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  |   Ganesh Slokas

॥ श्रीगणपत्यथर्वशीर्ष ॥

त्वं गुणत्रयातीतः त्वमवस्थात्रयातीतः ॥ त्वं देहत्रयातीतः ॥ त्वं कालत्रयातीतः ॥
त्वं मूलाधारस्थितोऽसि नित्यम् ॥ त्वं शक्तित्रयात्मकः ॥
त्वां योगिनो ध्यायन्ति नित्यं ॥ त्वं ब्रह्मा त्वं विष्णुस्त्वं रुद्रस्त्वं ॥
इन्द्रस्त्वं अग्निस्त्वं वायुस्त्वं सूर्यस्त्वं चन्द्रमास्त्वं ॥ ब्रह्मभूर्भुवःस्वरोम् ॥ ६॥

श्री गणपति अर्थर्वशीर्ष भावार्थ :

आप सीमा पार कर तथा तीनों गुण (सत्त्व, राजस, तामस) और शारीरिक चेतना के तीनों अवस्था (जागृत,निद्रा सुषुप्ति ) से परे हैं।
आप सीमा पार कर तथा तीनों अंग (शारीरिक या भौतिक, सूक्ष्म, कारणात्मक) और समय के तीनों अवस्था (अतीत, वर्तमान, भविष्य) से परे हैं।
आप मूलाधार (श्रोणि क्षेत्र) में बैठे हैं, जहां से कुंडलिनी शक्ति को जगाया जाता है। आप तीन शक्तियों (इच्छा, क्रिया, ज्ञान) से युक्त और नियंत्रित करते हैं । संतों, ऋषि तपस्वी, और योगियों आप पर सतत स्मरण और सदैव ध्यान करतें हैं। आप प्रजापति ब्रह्मा, संरक्षक विष्णु और विध्वंसक रुद्र हैं। आप इंद्र, अग्नि, वायु, सूर्य, चंद्र समेत ; पृथ्वी, आकाश मंडल, पाताल तथा आप ही ॐकार स्वरुप है ॥ ६॥

Gist of Shri Ganapati Atharva Sheersha:

You are beyond the three Gunas (Sattva,Rajas,Tamas) and the three states (of conscious, sleeping, dreaming),
as well as the three forms of bodies (corporal/physical, astral and causal) and the three time-periods (past, present, future). You possess and control the three powers of desire, action and knolwedge. You are seated in the Mooladhara (pelvic region) from where the Kundalini shakti is aroused. Sages, Rishis and yogis are always in your constant rememberance and meditate upon you. You are the Creator Brahma, the Protector Vishnu and the destroyer Rudra. You are the Indra, the Fire, the Air, the Sun, the Moon along with the three worlds of Earth, celestial Heavens and netherworld regions ; You are verily the OMKAR Brahman. (6)