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  |   Ganesh Slokas

॥ श्रीगणपत्यथर्वशीर्ष ॥

गणादिं पूर्वमुच्चार्य वर्णादिं तदनन्तरं ॥ अनुस्वारः परतरः ॥ अर्धेन्दुलसितं ॥ तारेण ऋद्धम् ॥
एतत्तव मनुस्वरूपं ॥ गकारः पूर्वरूपं ॥ अकारो मध्यमरूपं ॥ अनुस्वारश्चान्त्यरूपं ॥
बिन्दुरुत्तररूपं ॥ नादः सन्धानं ॥ संहितासन्धिः ॥ सैषा गणेशविद्या ॥
गणकऋषिः ॥ निचृद्गायत्रीच्छन्दः ॥ गणपतिर्देवता ॥ ॐ गं गणपतये नमः ॥ ७॥

श्री गणपति अर्थर्वशीर्ष भावार्थ :

मूलतः साहित्य भाषा में गणपति के मंत्र स्वरूप और उच्चारण, इस प्रकार है: शब्द गण के पहले अक्षर अर्थात "ग" पहले उच्चारण किया जाता है तुरंत बाद वर्ण (अ) अनुसरण किया जाता है | तत्पश्चात अर्ध चंद्र के साथ अलंकृत कर (नाक से चन्द्र बिंदु की ध्वनि "गँ"), तारा द्वारा संवर्धित किया जाता है| यह आपका मन्त्र (मनु) स्वरुप है | इस मन्त्र रूप में "ग" कार प्रथम रूप है; "अ" कारो मध्यम रूप और अनुस्वार ''न" अंतिम रूप है |
बिन्दू रूप शीर्ष है इस प्रकार "गँ" के गठन से चन्द्र बिंदु की ध्वनि नाक से प्रपत्र होता है | यह नाद (ध्वनि) के साथ शामिल हो गए है | जब सभी स्वरूपों और नाद के संग और सम्मिलन होता है, तब अंत में यह मंत्र एक दिव्य रूप लेता है | यह 'गणेश विद्या है गंणक ऋषि द्वारा दिया गया है और 'निचृद्गायत्री' छन्द में स्थित है | गणपति देवता (भगवान) की पूजा और आराधना ॐ गं गणपतये नमः है ( भगवान गणपति को मेरे श्रद्धामय प्रणाम ) ॥ ७॥

Gist of Shri Ganapati Atharva Sheersha:

Originally, in classical literature, the form and pronunciation of the Ganapati Mantra is :
Ganesha name starts with the letter 'ga', and immediately comes the letter 'a' . It ends with the letter 'sha'. But, in between an anuswara 'n' is beautifully symbolised as a resplendant crescent moon with a shining star. It has a symbolic meaning, representing the 'ganas' of prosody, with the letters and sounds of 'akAra'' (form), "anuswara"(sound) of the language.
The 'sandhis' of the grammar - (i.e. letter combinations of the consonants, akaara & anuswaras) -produce a divine melodious sound "Naada-Dhwani" . This hymn is called the "GANESHVIDYA", rendered by The sage 'GANAKA', who set it in 'NICHRIDGAYATRI' meter. It describes and worships the true form of the presiding deity is 'GaNapati', with the Mantrabeeja "OM GAM GANAPATAYE NAMAH:" I humbly prostrate before Lord Ganapati. (7)