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  |   Ganesh Slokas

॥ श्रीगणपत्यथर्वशीर्ष ॥
अनेन गणपतिमभिषिञ्चति स वाग्मी भवति ॥ चतुर्थ्यामनश्नन् जपति स विद्यावान् भवति । इत्यथर्वणवाक्यं ॥
ब्रह्माद्याचरणं विद्यात् न बिभेति कदाचनेति ॥ १२॥

श्री गणपति अथर्वशीर्ष भावार्थ :
जो भक्त श्री गणेश जी के उपासना करते हैं, वह भक्त, वाकपटु और भाषण की प्रवीण (वाग्मी ) बन जाते हैं; यदि चतुर्दशी पर व्रत रखकर, इस उपनिषद का पाठ व्यारूया करते हैं तथा एक महान विद्वान (विद्यावान) बन जाते हैं , यह अथर्वा ऋषि का वचन है||
वे, आखिर में, ब्रह्म ज्ञान (ब्रह्म विद्या) प्राप्त करते हैं, तत्पश्चात उन्हें कोई भी, कहीं भी, कभी भी और किसी से भी डर नहीं रहता है ॥ १२॥

Gist of Shri Ganapati Atharva Sheersha:
He who worships Ganapati and anoints Ganapati with this Upanishad becomes a fluent Speaker (Vagmi); He who fasts on Chaturdasi, recites this Upanishad becomes highly knowledgeable (Vidyavan) , This is the word of Atharvana Rishi. Finally, he attains the knowledge of Brahman (Brahma Vidya), and thereafter he never fears anyone, anywhere and at anytime. (12)