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  |   Ganesh Slokas

॥ श्रीगणपत्यथर्वशीर्ष ॥

यो दूर्वाङ्कुरैर्यजति स वैश्रवणोपमो भवति ॥ यो लाजैर्यजति स यशोवान् भवति ॥
स मेधावान् भवति ॥ यो मोदकसहस्रेण यजति स वाञ्छितफलमवाप्नोति ॥
यः साज्यसमिद्भिर्यजति स सर्वं लभते स सर्वं लभते ॥ १३॥

श्री गणपति अथर्वशीर्ष भावार्थ :
जो, गणपति की पूजा, दूर्वा घास के साथ करते हैं, वे कुबेर की तरह समृद्ध बन जायेंगे ; जो, गणपति की पूजा, लावा (लाई) से करते हैं, वे महा प्रसिद्ध और यशस्वि बन जायेंगे, वह बुद्धिजीवी (मेधावान्) भी बनते हैं|| जो, गणपति की पूजा, हज़ार मोदकों से करते हैं, वह अपने वांछित फल प्राप्त करेंगे || जो गणपति की पूजन, 'समित' (पूजन के लिए टहनियाँ ) घी में डूबा कर पूजा करते हैं, वह सब कुछ, बस, सब कुछ प्राप्त करते हैं॥ १३॥

Gist of Shri Ganapati Atharva Sheersha:
He who worships Ganapati with tender Durva Grass, will become Prosperous like Kubera; He who worships Ganapati with Parched Rice, will become Glorious (will have Name and Fame); He will also become Intellectual (Medhavan ). He who worships Ganapati with thousand Modakas (a type of Sweetmeat), will obtain his Desired Fruits; And He who worships (Ganapati) with 'Samit' Twigs dipped in Ghee, he obtains Everything, just Everything.