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  |   Ganesh Slokas

॥ श्रीगणपत्यथर्वशीर्ष ॥

अष्टौ ब्राह्मणान् सम्यग्ग्राहयित्वा सूर्यवर्चस्वी भवति ॥
सूर्यग्रहे महानद्यां प्रतिमासंनिधौ वा जप्त्वा सिद्धमन्त्रो भवति ॥
महाविघ्नात्प्रमुच्यते ॥ महादोषात्प्रमुच्यते ॥
महापापात् प्रमुच्यते ॥ स सर्वविद्भवति स सर्वविद्भवति ॥
य एवं वेद इत्युपनिषत् ॥ १४॥

श्री गणपति अथर्वशीर्ष भावार्थ :

जो आठ ब्राह्मणों को यह (अथर्ववेद) उपदेश शिक्षण द्वारा पढ़ाता है, वह सूर्य जैसा भव्य और शोभित होता है; जो सूर्यग्रहण के समय,एक बड़ी नदी में खड़े होकर मन्त्र-जप, अथवा, श्री गणेश जी की मूर्ती सामने मन्त्र-जप करता है, वह मन्त्र-सिद्ध बनता है; वह बड़ी बाधाओं, विघ्नों से मुक्त होता है; वह महान दोषों तथा गुनाहों और अन्य बुरे प्रवृत्तियों से (जो जीवन को डुबाती है) विमुक्त होता है; वह सर्व-ज्ञानी बनता है; वास्तव में यह वेद ,परम ज्ञान और परम तत्त्व है! इस प्रकार अथर्व उपनिषद, जिसमें -गणपति के रूप में सन्निहित सर्व-मुक्त ब्रह्म-चेतना का संदेश है, तथा सभी के लिए नई आशा की किरण जागृत करता है,- यह अथर्व उपनिषद है ॥ १४॥

Gist of Shri Ganapati Atharva Sheersha:

He who makes Eight Brahmins receive this Upanishad, shines like the splendour of the Sun; He who recites this during Solar Eclipse on the bank of a great River or in-front of the image of Ganapati, becomes Mantra-Siddha; He becomes free from great Obstacles, gets liberated from great Vices, Sins which drowns the life like a River; He becomes All-Knowing. This indeed is the Veda (the ultimate Knowledge)! This is The Atharva Upanishad, giving the message of -the all-freeing Brahman Consciousness embodied as Ganapati- and fresh hope to all. (14)