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  |   Ganesh Slokas

॥ श्रीगणपत्यथर्वशीर्ष ॥
॥ शान्ति मन्त्र ॥ (अविच्छिन्न)
स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवाः । स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः ॥
स्वस्तिनस्तार्क्ष्यो अरिष्टनेमिः। स्वस्ति नो बृहस्पतिर्दधातु ॥
ॐ शान्तिः । शान्तिः ॥ शान्तिः ॥
इति श्रीगणपत्यथर्वशीर्षं समाप्तम् ॥ १७ ॥

श्री गणपति अथर्वशीर्ष भावार्थ :
॥ शान्ति मन्त्र ॥ (अविच्छिन्न)
इंद्र देवता (देवों के प्रजापति) से प्रार्थना है की हमें बुद्धिमता, यश और समृद्धि प्रदान करें; पूशा (सूर्य देवता -प्रतिपालक, अनुरक्षक ) से प्रार्थना है की हमें उचित ज्ञान एवं श्रेष्ठता अनुदान करें; ताक्षर्य ( गरुड़ -एक पौराणिक पक्षी) जो सुरक्षा के प्रसिद्ध है, हमें दुर्भाग्य से रक्षा, भलाई और कल्याण का अनुदान करें; बृहस्पति , जो देवताओं के गुरु है, उनसे प्रार्थना है की वे हमें भलाई, सलामती और सौभाग्य प्रदान करें॥
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः सब तरह से (हमारे बाहर और भीतर, दोनों) पूर्ण रूप से शांति बनाई रहें॥
इस प्रकार 'गणपति अथर्व शीर्षम् ' स्तोत्र समाप्त होता है ॥ १७ ॥

Gist of Shri Ganapati Atharva Sheersha:
Shanti Mantra: (continued)
May Indra (God of Devas) bestow on us great Wisdom, prosperity and Glory; May Pushan ( Sun God, The Nourisher, Protector) grant us great Knowledge and excellence; May Tarksya ( Garuda-A Mythical Bird) protect us from misfortunes, grant us security and Well-Being; May Brihaspati,The Guru of the Devas, grant us Well-Being, safety and good-luck.
Om, Peace, Peace, Peace . May there be peace all around(both outside and inside us).
Thus ends the hymn 'Ganapati atharva shIrShaM.' (17)