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  |   Ganesh Slokas

श्री गणपतिस्तवः
ऋषिरुवाच ॥
श्री गणेशाय नमः ॥
ब्रह्मविष्णुमहेश्वरा ऊचुः।
अजं निर्विकल्पं निराहारमेकं निरानन्दमानंदमद्वैतपूर्णम् ।
परं निर्गुणं निर्विशेषं निरीहं परब्रह्मरूपं गणेशं भजेम् ॥१॥

श्री गणपति स्तवः
श्री गर्ग महर्षि द्वारा रचित
भगवन श्री गणेश जी को प्रणाम॥
ब्रह्मा, विष्णु, महेश्वर उच्चारण किए :-
हम पूजा करते हैं - जो अजन्मे, अपरिवर्तनीय, निराकार है, जो आनंद से परे है और परमानंद की पूर्ण है, जो अद्वैत की परिपूर्णता है, जो सर्वोच्च, गुणों से रहित है, जो मतभेद के बिना एवं निरपेक्ष है, जो जुनून के बिना एवं इच्छा से परे है, वह श्री गणेश जी की जो सर्वोच्च और परब्रह्म है।।१।।

Shri Ganapati Stavah
[Composed by Shri Garga Maharishi dedicated to Lord Ganesha ]
Salutations to Lord Ganesha!
Brahmā Viṣṇu and Maheśa spoke:-
We worship the unborn, unchanging, formless one, who is beyond bliss, and full of bliss; who is the fullness of non-duality, the supreme, devoid of qualities, without differences, and beyond desire; Sri Ganesha, the Supreme Brahman personified. (1)