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संकष्टनाशनं गणेशस्तोत्रम्

संकटनाशनगणेशस्तोत्रम् अर्थ

Sankata Nasana Ganesha Stotram (Meaning)

अष्टभ्यो ब्राह्मणेभ्यश्च लिखित्वा य: समर्तयेत् । तस्य विद्या भवेत्सर्वा गणेशास्य प्रसादत: ॥८॥

जो मनुष्य इसे लिखकर आठ ब्राह्मणों को समर्पण करता है, गणेश जी की कृपा से उसे सब प्रकार की विद्या प्राप्त हो जाती है ॥८॥

One who gets this prayer, Written by Eight Brahmanas, And offers it to Lord Ganesa, Will become more knowledgeable, And would be blessed with all stellar qualities, By the grace of Lord Ganesa. ।। 8 ।।

॥ इति श्रीनारदपुराणे संकष्टनाशनं गणेशस्तोत्रं सम्पूर्णम्॥

इस प्रकार नारद पुराण के संकटनाशन गणेशस्तोत्रम् समाप्त होता है जो सब दुखों को नष्ट कर देता है ।

Thus ends the prayer to Ganesa from Narada Purana which would destroy all sorrows.