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  |   Ganesh Slokas

॥ श्री गणपतिस्तवः॥
त्वदीये मनः स्थापयेदङ्घ्रियुग्मे जनो विघ्नसङ्घान्न पीडां लभेत ।
लसत्सूर्यबिम्बे विशाले स्थितेऽयं जनो ध्वान्तबाधां कथं वा लभेत ॥ ११॥

श्री गणपतिस्तवः॥
जो भक्त जन आपके दिव्य चरणों में, श्रद्धा से साष्टांग प्रणाम करते हैं, वे सभी बाधाओं से मुक्त हो जाएँगे ; जो चमकते सूरज की तरह बहुत विशाल और देदीप्यमान है, आप की मौजूदगी में, कैसे लोग अंधेरे के अधीन हो जाएंगे ? ॥ ११॥

Shri Ganapati Stavah :
Those who prostrate to Your Feet would be freed from obstacles; the One who is like the shining Sun very vast, when you are present, how would people be subjected to darkness? (11)