Shree Ganesh Chalisa - Shlok 15 (श्री गणेश चालिसा - श्‍लोक १५)

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श्‍लोक:
हाहाकार मच्यो कैलाशा, शनि कीन्हों लखी सुत को नाशा,
तुरत गरुडा चढी विष्णु सिधाए, काटी चक्र सो गजशिरा लाये ॥ १५ ॥
श्‍लोक भावार्थ :
पार्वती के बेटे का, शनि के विनाश से, कैलाश में, पूरी तरह से हाहाकार मच गया ।
तुरन्त भगवान विष्णु, उनकी गरुड़ पर सवार कर , बच्चे के कटे सिर की खोज के लिए, स्वर्ग की तरफ उड़ निकले।
खोज में नाकाम होने से , भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र द्वारा , उनके रास्ते का पहला जीव, अर्थात, एक हाथी का सिर काट कर, कैलाश लाये ॥ १५ ॥
Shlok (Verse) Meaning:
Kailasha was totally devatated & chaotic by Shani's destruction of Parvati's son.
Instantly, Lord Vishnu climbed on His Garuda and flew heavenward, searching for the child's severed head.
Failing to find, Vishnu cut the head of an elephant with His chakra and brought it to Kailasha. (15)

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