॥ श्रीगणपत्यथर्वशीर्ष ॥१ ॥

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श्री गणपति अर्थर्वशीर्ष श्लोक :

ॐ नमस्ते गणपतये त्वमेव प्रत्यक्षं तत्त्वमसि । त्वमेव केवलं कर्ताऽसि ।
त्वमेव केवलं धर्ताऽसि । त्वमेव केवलं हर्ताऽसि । त्वमेव सर्वं खल्विदं ब्रह्मासि ।
त्वं साक्षादात्माऽसि नित्यम् ॥१॥

श्री गणपति अर्थर्वशीर्ष भावार्थ :
भगवन श्री गणपति को मेरे प्रणाम । तुम हो निर्माता, पालनहार, रक्षक और सभी प्राणियों के विध्वंसक। आप वास्तव में प्रत्यक्ष अनुभव, तत्त्व ब्रह्म के रूप में हैं ।
आप हम सभी के अनन्त अंतर आत्म निवासी हैं, जो सभी को चेतना दे रहें हैं ॥१॥

Shri Ganapati Atharva Sheersha Gist :
I bow to thee, Ganapati . You are personified form of the Brahman . You are the creator, protector and destroyer of all beings, You are the in-dweller eternal evident Self in all of us. (1)

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