॥ श्रीगणपत्यथर्वशीर्ष ॥३ ॥

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श्री गणपति अर्थर्वशीर्ष श्लोक :

अव त्वं माम् । अव वक्तारम् । अव श्रोतारम् ।
अव दातारम् । अव धातारम् । अवानूचानमव शिष्यम् ॥
अव पश्चात्तात् । अव पुरस्तात् । अवोत्तरात्तात् । अव दक्षिणात्तात् ।
अव चोर्ध्वात्तात् । अवाधरात्तात् । सर्वतो मां पाहि पाहि समन्तात् ॥३॥

श्री गणपति अर्थर्वशीर्ष भावार्थ :
(हे गणपति) (अब) मुझे रक्षा करो, मेरी घोषणा की रक्षा करो, श्रोता की रक्षा , दाता की रक्षा , सृष्टिकर्ता की रक्षा करो ,शिक्षक की रक्षा, शिष्य की रक्षा करो
(हे गणपति) पश्चिम से, पूर्व से इस सत्य की रक्षा ; उत्तर से और दक्षिण से इस सत्य की रक्षा करो,
(हे गणपति) ऊपर से , नीचे से इस सत्य की रक्षा,
(हे गणपति) सब तरफ से रक्षा और चारों ओर से रक्षा करना ॥३॥

Shri Ganapati Atharva Sheersha Gist:
O Ganapati! Please protect me, Please protect the Proclaimed Truth!
Please protect the Speaker, the Listener, the Teacher and the taught, and the Giver of Proclaimed Truth .
O Ganapati! Please protect the proclaimed Truth from all sides and all the directions(North, South, East and West). (3)

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Original photo credit : DUTA User Mr. Sanjay Kevlani (741*02)