श्री गणेश चालिसा -३ -Shree Ganesh Chalisa -3

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श्‍लोक:

वक्रतुंडा शुची शुन्दा सुहावना, तिलका त्रिपुन्दा भाल मन भावन,

राजता मणि मुक्ताना उर माला, स्वर्ण मुकुता शिरा नयन विशाला ॥ ३॥

श्‍लोक भावार्थ :

लो निहारना ! अपनी हाथीसम्मुख सुंदरता, खूबसूरती से सुशोभित अर्धचन्द्र - आकार का पवित्र तुण्ड (वक्रतुण्ड ) और एक चमकीला दिव्य हाथीदंत - इसे देखकर, सभी लोक मंत्र-मुग्ध है ॥ अपनी छाती पर रत्नों की माला है, अपने मुकुट पर चमकते रत्नों के एक ताज और अपनी सुन्दर आँखें तो पूर्ण विकसित कमल की सुंदरता को दर्शाता है ॥ ३ ॥

Shlok (Verse) Meaning:

O Ganesha, behold your loveliness (Vakratunda) with an elephant face, well-adorned crescent- shaped sacred trunk and resplendent tusk , the triple mark on your forehead is as beautiful as the moon, and all the worlds are spell-bound at Your Beauty. On Your bosom is a garland of jewels, on Your Head is a crown of shining gems and Your beautiful Eyes reflects the beauty of the full-blown lotus! ॥3॥

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Original photo credits: DUTA User Mr.Ashish (970*80)