श्री गणेश चालिसा - १८ -Shree Ganesh Chalisa- 18

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श्‍लोक:
चरण मातु-पितु के धारा लीन्हें, तिनके सात प्रदक्षिना कीन्हें
धनि गणेशा कही शिव हिये हरष्यो, नाभा ते सुरन सुमन बहु बरसे ॥ १८ ॥
श्‍लोक भावार्थ :
सर्वोच्च श्रद्धा -भक्ति पूर्वक , आप अपने माता-पिता के चरण छूकर , उन्हें ७ - बार प्रदक्षिणा कर , प्रणाम किये । धन्य हो तुम, हे गणेश जी! भगवान शिव और पार्वती के मनभावन होकर , आपको पृथ्वी की परिक्रमा करने का फल पुरस्कृत हुआ ; यहाँ तक की, देवताओं ने भी आप पर फूलों के साथ की बौछारें की ! ॥ १८ ॥
Shlok

Charana Maatu-Pitu Ke Dhara Liinhen, Tinake Saat Pradakshina Kiinhen
Dhani Ganesha Kahi Shiva Hiye Harashyo, Nabha Te Suran Suman Bahu Barse (18)

Shlok (Verse) Meaning:
With total devotion , you touched the feet of your parents and circumambulated them 7 times. Blessed are you, O Ganesha ! Pleasing Lord Shiva and Parvati , you got rewarded with the fruit of having circumnavigated the earth ; even the Gods showered flowers on you! (18)

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Original photo credit: DUTA User Vani (981*32)