।। श्री गणेश चालिसा स्तुति ।। Shree Ganesh Chalisa Hymn (Stuti)

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स्तुति :

प्रातः स्मरामि गणनाथमनाथबन्धुं। सिंदूरपूरपरिशोभित गण्डयुग्मम् ।।

उद्दण्डविघ्नपरिखण्डनचण्डदण्डं । आखण्डलादि सुरनायक वृन्दवन्द्यम् ॥

स्तुति भावार्थ :

प्रातः काल में, वह गणों के भगवान (गणपति) के स्मरण में ध्यान करता हूँ - जो सब शरण लिए लोगों के दोस्त व रक्षक हैं,

जिनकी खूबसूरत चेहरे सिंदूर से सजी है, जो बहुत शक्तिशाली है और सबसे कठिन,

बृहत्काय बाधाओं का विनाश करते हैं , जो राजा इंद्र तथा स्वर्ग के सभी देवताओं द्वारा पूजे जाते हैं -

वह भगवान गणपति को मेरे अपार प्रणाम !

Stuti (Hymn):

PRATAH SMARAAMI GANANATHA MANATHABANDHUM ।

SINDOORAPOORA PARISHOBHIT GANDA YUGMAM ।।

UDDANDA VIGHNA PARIKHANDANA CHANDA DANDAM ।

AAKHANDALAADI SURANAAYAKA VRINDAVANDYAM ।।

Meaning of Hymn (Stuti):

In the morning hours, I remember & meditate upon the Lord of ganas (Ganapati)

Who is the friend & saviour of those who seek refuge in HIM,

Whose beautiful face is adorned by Sindoor, Who is very powerful and destroys the greatest of obstacles;

He who is worshipped by Indra and other Devtas of heaven,

My humble immense salutations to HIM !

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Original Photo Credits: DUTA User Mr. Ashish (970*80)