🇮🇳भारतीय डॉक्टरों पर 😱चौंकाने वाला 📄रिपोर्ट 🌐डब्ल्यू एच ओ द्वारा

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फ्रॉस्ट🐺द्वारा

🌐 विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की एक रिपोर्ट, जो जून '१६ में प्रकाशित, जिसका शीर्षक ' द हेल्थ वर्क फ़ोर्स🇮🇳 इन इंडिया में कहा जाता है कि २०११ में 🇮🇳 भारतीय एलोपैथिक 👷 डॉक्टरों के ३१ % केवल माध्यमिक विद्यालय स्तर तक शिक्षित थे, और ५७ % चिकित्सकीय योग्य नहीं थे। 🇮🇳 भारत के ग्रामीण इलाकों में एलोपैथिक 👷 डॉक्टरों का केवल १८.८ % चिकित्सकीय योग्य थे । चिकित्सा परिषद के सचिव , सेक्रेटरी ऑफ़ थे मेडिकल कौंसिल ऑफ़ 🇮🇳 इंडिया (एमसीआई) डॉ रीना नैयर 🔉 ने कहा, "मुझे नहीं लगता कि एमसीआई को, अभी तक, इस रिपोर्ट आधिकारिक तौर आया हुआ है। लेकिन सामान्य तौर पर, जो व्यक्ति एलोपैथिक दवा का पेशेवर हैं उन्हें पंजीकृत चिकित्सा की योग्यता नहीं है, तो वह व्यक्ति नीमहकीमी के तहत आता है।" रिपोर्ट 📄 के अनुसार पुरुषों की तुलना में से ३८ % महिला 🙋🏻 कार्यकर्ताओं को अधिक चिकित्सकीय योग्य ✅ पाए गए। एलोपैथी में, पुरुषों की ३८% की तुलना से महिलाएं🙋🏻 तो ६७ % योग्य थे। 🇮🇳 भारत में 👷 डॉक्टरों (एलोपैथिक, आयुर्वेदिक होम्योपैथिक और यूनानी) की कुल संख्या प्रति 1⃣ लाख 👥 जनसंख्या केलिए ८० थे । तुलनात्मक कथन हेतु , 🇨🇳 चीन का प्रति 1⃣ लाख 👥 जनसँख्या केलिए १३० डॉक्टरों है।

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