एचआईवी💉उन्मूलन🚫धीमी प्रगति😕

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फ्रॉस्ट🐺द्वारा

👥भारत एचआईवी 😕एड्स उन्मूलन की दिशा में लगातार कठिन प्रयास कर रहा है। एचआईवी से संबंधित मामलों को पूर्ण रूप से ख़त्म किये जाने के प्रयास किये जा रहे हैं एवं पिछले saal में भारत ने इस प्रयास में धीमी सफलता भी पाई है। लैंसेट एचआईवी जर्नल📕 में "द न्यू ग्लोबल बर्डन ऑफ़ डिसीज़ २०१५ " शीर्षक से प्रकाशित एक अध्ययन 📄 में पाया गया कि २८.८१ लाख भारतीयों 👥 एचआईवी के साथ जी रहे थे 😕 उस अध्ययन के आकलन अनुसार, यह पिछले वर्ष भारत🇮🇳 में १.९६ नए संक्रमणों और दुनिया भर में २५ लाख नए संक्रमणों दिखाया था, जो 🔟साल में नहीं बदला है। यह नए एचआईवी संक्रमण में १९९७ और २००५ के बीच २.७ % गिरावट की तुलना में, इसका २००५ और २०१५ के बीच ०.७ % पर धीमी गति से गिरावट दिखाता है। हालांकि, सन् २००० में संक्रमित😷 की संख्या २७.९६ मिलियन से सन् २०१५ में ३८.८ मिलियन तक बढ़ 📈 गया है । एंटी रेट्रोवायरल थेरेपी (एआरटी) के प्रयोग में आने के बाद, वार्षिक आधार पर, एड्स/ एचआईवी के संख्या में २००५ के १.८ मिलियन से २०१५ में १.२ मिलियन तक घटकर, कमी आई। वाशिंगटन विश्वविद्यालय से प्रमुख लेखक ✍हेडॉन्ग वांग 🔉 ने कहा, "हालांकि एंटीरेट्रोवाइरल थेरेपी के तथा मां से बच्चे पर संचरण को रोकने के उपायों के पैमाने से अब जान बचाने पर भारी प्रभाव पड़ा है. हमारे नए निष्कर्ष पिछले यह १० वर्षों में नए एचआईवी संक्रमण को कम करने कि दिशा में धीमी गति कि प्रगति की चिंतित तस्वीर प्रस्तुत करते हैं। "

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