Shri Ganapati Atharvashirsha (4)॥ श्रीगणपत्यथर्वशीर्ष ॥४॥

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Shri Ganapati Atharvashirsha Shloka:

Tvam Vangmayastvam Chinmaya | Tvam Anandmayastvam Bramhamaya |

Tvam Sachitananda Dvitiyosi | Tvam Pratyaksham Bramhasi |

Tvam Jnanmayo Vijnanamayo Asi || 4||

Shloka Meaning :

You are the word, deed and thought . You are full of great Happiness, filled with Brahma (Ananda) i.e.bliss.
You are the truth, consciousness and bliss.You are the entire knowledge and science .
You are the non-dual Universal Self .
You are the personified Brahman, appearing before us. (4)

श्रीगणपत्यथर्वशीर्ष श्लोक :

त्वं वाङ्मयस्त्वं चिन्मयः । त्वमानन्दमयस्त्वं ब्रह्ममयः ।
त्वं सच्चिदानन्दाऽद्वितीयोऽसि । त्वं प्रत्यक्षं ब्रह्मासि ।
त्वं ज्ञानमयो विज्ञानमयोऽसि ॥४॥

श्री गणपति अर्थर्वशीर्ष भावार्थ :

आप शब्दों से भरे हुए हैं भाषा के मालिक हैं । आप बेहद खुशी से, ब्रह्मआनंद से भरे हुए हैं।
सत् चित्त और आनंद है | आप अविभाज्य और गैरदोहरी है |
आप स्पष्टतया सर्वोच्च अस्तित्व ब्रह्मन् है |
आप संपूर्ण ज्ञान विज्ञान विद्या है ॥४॥

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Original Image credits:📷 Duta User K.Tadawala(992*22)