Shri Ganapati Atharvashirsha (8)॥ श्रीगणपत्यथर्वशीर्ष ॥ ८॥

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Shri Ganapati Atharva Shirsha Shloka:

Shri Ganesh Gayatri Mantra:

Ek Dantaya Vid Mahe vakra Tundaya Dhimahi
Tanno danti Prachodayat || 8 ||

Shloka Meaning:

Let our mind go to the Ekadanta (the One with a Single Tusk) to know His Conscious Form deeply; And then Meditate on that Vakratunda (the One with a Curved Trunk) to get absorbed in His Conscious Form. May that One-tusked Lord awaken and inspire us for Meditation. (8)

॥ श्रीगणपत्यथर्वशीर्ष श्लोक :
॥ गणेश गायत्री ॥
एकदन्ताय विद्महे । वक्रतुण्डाय धीमहि ॥
तन्नो दन्तिः प्रचोदयात् ॥ ८॥

श्री गणपति अर्थर्वशीर्ष भावार्थ :
श्री गणेश गायत्री मंत्र ॥
भगवान गणेश के सचेत-रूप गहराई तक जानने लिए, हम हमारे मन वह एक दन्तवाले के प्रति केंद्रित करते हैं और वह वक्रतुंड (जिनके सूंड घूमा हुआ है ) के प्रति ध्यान करते हुए, उनमें लीन हो जायें॥ वह एक दन्तवाले से विनती हैं कि वे हमें ध्यान के लिए प्रेरित करें ॥ ८॥

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Original Image credit:📷Duta User SaiKumar(953*62)