इंटरनेट पर अश्लील कंटेट पर SC सख्त, 'हम रोक चाहते हैं, न कि उपचार'

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सुप्रीम कोर्ट ने गूगल जैसे इंटरनेट सेवा प्रदाताओं (आईएसपी) से पूछा कि वेबसाइटों पर अश्लील सामग्री अपलोड करने वाले अपराधियों की पहचान करने के लिए क्या कोई तंत्र है।

जस्टिस मदन बी लोकुर और न्यायमूर्ति यू यू ललित की पीठ ने महिलाओं और बच्चों की प्रतिष्ठा और गरिमा को नुकसान का उल्लेख किया, जिनका अश्लील वीडियो वेबसाइटों पर अपलोड किया जाता है और गूगल के वकील से पूछा कि क्या कोई तंत्र है जो इस तरह की आपत्तिजनक सामग्रियों को अपलोड किए जाने से पहले अपराधियों की पहचान करे।

गूगल की तरफ से उपस्थित सीनियर वकील साजन पूवैया ने कहा कि आईएसपी (इंटरनेट सेवा प्रदाता) होने के नाते उसने अपने द्वारा होस्ट की गई सामग्रियों की सूची बनाई और जब उसे उसके संज्ञान में लाया गया तो उसे हटा लिया गया।

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