👉अब आम अदालतों में 👎नहीं चलेगा नेताओं पर 👨‍⚖️मुकदमा!

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देशभर के दागी नेताओं के खिलाफ चल रही विभिन्न प्रकार के मामलों की अब आम अदालतों में सुनवाई नहीं हो सकेगी। इन नेताओं के मामलों की जल्द सुनवाई तथा त्वरित कारवाई के लिए मोदी सरकार देशभर में करीब 12 स्पेशल अदालतें बनवाएगी। इन अदालतों में दागी नेताओं के खिलाफ भी सुनवाई की जाएगी। इससे उन्हें उनके किए की सजा जल्द मिल सकेगी।

सुप्रीम कोर्ट में सौंपे हलफनामे में केंद्रीय कानून मंत्रालय की तरफ से कहा गया है कि ऐसी अदालतें साल भर में गठित कर ली जाएंगी। सरकार ने इसका प्रारूप बना लिया है। इन अदालतों के गठन पर करीब 7.8 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। गौरतलब है कि देशभर में सैकड़ों राजनेता हैं जिन पर मुकदमे लंबित हैं।

न्याय में होने वाली देरी की वजह से ऐसे नेता कई बार चुनकर संसद या विधान सभाओं में पहुंच जाते हैं, जबकि नियमानुसार एक बार दोषी और सजायाफ्ता हो जाने पर किसी भी सांसद या विधायक की सदस्यता जनप्रतिनिधि कानून के तहत स्वत ही समाप्त हो जाती है, मगर कानूनी उलझनों का फायदा उठाकर अपराधी किस्म के नेता अपनी सदस्यता बचाए रहते हैं।

पिछले महीने नवंबर में सुप्रीम कोर्ट ने सजायाफ्ता नेताओं के चुनाव लडऩे पर आजीवन प्रतिबंध लगाने की वकालत की थी। चुनाव आयोग की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से स्पेशल कोर्ट बनाने की संभावनाओं पर केंद्रीय कानून मंत्रालय से छह हफ्तों में हलफनामा देने को कहा था।

मामले में तो पहले केंद्र सरकार ने कहा कि हम स्पेशल कोर्ट के लिए तैयार हैं लेकिन यह राज्यों का मामला है। तब कोर्ट ने केंद्र सरकार के वकील को झिडक़ते हुए कहा था कि आप सेंट्रल फंड से स्पेशल कोर्ट बनाने की व्यवस्था करें। कोर्ट ने अगली सुनवाई पर कोर्ट की संख्या और उसके लिए फंड के बारे में जानकारी मांगी थी। सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक इन स्पेशल कोट्र्स में स्पीडी ट्रायल होगा। ताकि जल्द से जल्द दागी नेताओं पर फैसला लिया जा सके और उन्हें राजनीति से बाहर किया जा सके।

यहां देखें फोटो-http://v.duta.us/jhmT7QAA

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