मूवी रिव्यू📽: वंडर वूमैन, बेवॉच, डियर माया, दोबारा: सी योर ईविल, ए डेथ इन दा गंज

  |   समाचार / बॉलीवुड

वंडर वूमैन

ड्यूटा रेटिंग (3/5)

यहां देखें ट्रेलर📹: https://goo.gl/mQL0XP

वंडर वुमैन फिल्म में बेहतरीन हुनर, अच्छे डायलॉग, धमाकेदार स्टोरी व एक्शन सीन का मिलाजुला मसाला परोसा गया है। यही कारण है कि फिल्म की लम्बी अवधि के बाद लोग ऊबते नहीं है। डीसी ने इस फिल्म में बैटमैन व सुपरमैनम के एक्शन दृश्यों की तहर कुछ नया करने की कोशिश की है। फिल्म में दृश्यों को बड़ी चतुराई व समझदारी के साथ शूट किया गया है। गैल गादोत को पर्दे पर राजकुमारी के रूप में दिखाया गया है और क्रिस पाइन दूसरे रोल में अच्छे लग रहे हैं। निर्माताओं ने प्रथम विश्व को फिर से लोगों के सामने लाने का प्रयास किया है।
कुल मिलाकर यह फिल्म वास्तव में डीसी ब्राण्ड के प्रशंसकों के लिए बहुत अच्छी है।

डायरेक्टर पैटी जेनकिंस
आपके क्षेत्र में फिल्म के समय के लिए टाइप करें- m6055

बेवॉच

ड्यूटा रेटिंग (2/5)
यहां देखें ट्रेलर📹: https://goo.gl/8BW4iw

यदि आप प्रियंका चौपड़ा फैन हैं तो ही बेवॉच फिल्म देखने जाएं। इसमें कुछ विशेष नहीं किया गया है। बॉक्स ऑफिस पर फिल्म न तो इंटरनेशनल मार्केट और न ही भारत में अच्छा बिजनस करने का दम रखती है। भारत में फिल्म की रिलीज से पहले ही विदेशी मीडिया ने इस फिल्म को पूरी तरह से नकार दिया है, जिसका असर इंडियन बॉक्स ऑफिस पर पडऩा तय माना जा रहा है। ऐसे में ड्वेन जॉनसन दा रॉक की यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कोई करिश्मा कर पाएगी, ऐसे आसार कम ही हैं। वहीं प्रियंका के फैन्स के लिए फिल्म खास है, क्योंकि उनकी चहेती ऐक्ट्रेस का इस फिल्म में बदला लुक है। जहां सेंसर ने फिल्म के कई सीन पर कैंची चलाई तो वहीं प्रियंका के बोल्ड लुक वाले सीन पर नरमी बरती है। ऐसे में बेवॉच में ऐसा कुछ खास नहीं कि हम फिल्म को देखने की सिफारिश करें और हां, फिल्म के डब वर्जन में कई संवाद चालू दर्जे के हैं।

निर्देशक सेठ गॉर्डन
आपके क्षेत्र में फिल्म के समय के लिए टाइप करें- m5730

डियर माया

ड्यूटा रेटिंग (3/5)
यहां देखें ट्रेलर📹: https://goo.gl/v3x9Xq

'डियर माया' मनीषा कोईराला के लिए एक कमबैक फिल्म है। निस्संदेह वह बॉलीवुड के बेहतरीन कलाकारों में से एक है। उन्हें पर्दे पर पहली बार माया के रूप में बूढ़ी, कुरूप, तन्हा किरदार में देखना प्रसंशकों को आघात दे सकता है। सेकंड हाफ के बाद माया चौंकाने में कामयाब रहती हैं। यह मनीषा जैसी समर्थ अभिनेत्री के अभिनय का जलवा और जुर्रत है कि उन्होंने अपनी वापसी के लिए इस तरह के किरदार को चुना।
माया (मनीषा) शिमला में उपेक्षा का जीवन जीती है। जब तक दो स्कूली विद्यार्थी (मदीह इमाम और श्रेया चौधरी) देव के फर्जी प्रे्रम पत्रों के साथ शरारत करते हैं। देव पर विश्वास कर माया घर बेच देती है।
यह फिल्म एक दिलचस्प कहानी के साथ शुरू होती है। इसमें तीनों मुख्य पात्रों बेहतरीन अभिनय किया है।

निर्देशक-सुनैना भटनागर

दोबारा: सी योर ईविल

ड्यूटा रेटिंग (3/5)
यहां देखें ट्रेलर📹: https://goo.gl/jQkPxm

राज और 1920 सीरीज की भूतिया फिल्में देखने के बाद अगर आप किसी टिपिकल भूत की तलाश में 'दोबारा' जैसी फिल्म देखने जाएंगे तो आपको निराशा ही हाथ लगेगी। यहां आपको डराने वाला कोई टिपिकल भूत नहीं है बल्कि जैसा कि फिल्म के नाम से ही साफ हो रहा है कि इसमें आपके भीतर के पापी की बात की गई है। दरअसल यह बॉलिवुड टाइप की हॉरर फिल्म नहीं बल्कि 2013 में आई एक अमेरिकन हॉरर फिल्म की ऑफिशल रीमेक है।
इसमें एक बहन अपने पिता की हत्या में फंसे भाई की बेगुनाही साबित करने के लिए संघर्ष करती है। असल जिंदगी में भाई-बहन हुमा और साकिब ने फिल्म में भाई-बहन के किरदार को संजीदगी से निभाया है और अपने लिए एक नए जॉनर की तलाश भी की है। वहीं, उनके पिता का रोल करने वाले आदिल हुसैन हमेशा की तरह ऐक्टिंग के मामले में लाजवाब रहे हैं जबकि लीजा रे ने भी अपने किरदार को बखूबी निभाया है। इनके अलावा, नताशा और कबीर के बचपन का रोल करने वाले बाल कलाकारों ने भी अच्छी ऐक्टिंग की है। फिल्म का फस्र्ट हाफ थोड़ा बोझिल है तो सेकंड हाफ में फिर भी कहानी की परतें खुलती हैं। भाई-बहनों को अपने अतीत की भयावहता का सामना करना पड़ता है ऐसे में निर्देशक ने शानदार प्रदर्शन कर कहानी को मनोरंजक बनाने का प्रयास किया है।

निर्देशक- प्रवाल रमन

ए डेथ इन दा गंज

ड्यूटा रेटिंग (3/5)

यहां देखें ट्रेलर 📹: https://goo.gl/1CDFAS

यह एक लीक से हटकर बनाई गई फिल्म है। फिल्म की कहानी बड़े व बेकार परिवार की छुट्टियों के साथ शुरू होती है। हालांकि, यह एक सामान्य फिल्म नहीं है, क्योंकि इसमें बदमाशी, कामुकता और पारिवारिक मूल्यों के हास को दिखाया गया है। कोंकणा सेन शर्मा ने कहानी और किरदारों के साथ पूरी ईमानदारी बरती है। जिस किरदार को जितनी फुटेज मिलनी चाहिए उतनी फुटेज ही उस किरदार को दी गई है। फिल्म शुरू से अंत तक बेहद धीमी गति से चलती है। यह समझ से परे है कि कोंकणा ने फिल्म को किसी एक भाषा पर फोकस न करके तीन भाषाओं का इस्तेमाल क्यों किया है। कोंकणा अगर फिल्म को उत्तर भारत सहित दूसरे हिंदी भाषी राज्यों में हिंदी सबटाइटल्स के साथ रिलीज करतीं तो ज्यादा अच्छा रहता।

निर्देशक- कोंकणा सेन शर्मा

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