क्लेम💴 के लालच में भाई की मौत 🤜के आठ माह बाद कराया फर्जी 👨‍⚕️पोस्टमार्टम

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कहते हैं कि लालच बुरी बला है, इसके चक्कर में जो फंसा उसे बड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यह कहावत राजस्थान के दौसा जिले में उस समय सही चरितार्थ हो गई जब एक जने ने एलअाईसी के क्लेम के लालच में आठ माह पहले बिमारी से मरे भाई को फिर से जिंदा कर दिया और दुर्घटना में मौत बताकर जरिए इस्तगासा मामला दर्ज करा दिया।

इतना ही आरोपित ने एक अधिवक्ता व जिला चिकित्सालय के एक चिकित्सक के मिलीभगत कर उसका फर्जी पोस्टमार्टम भी करा दिया, लेकिन पुलिस जांच में उसकी इस साजिश का पर्दाफाश हो गया और पुलिस ने मृतक के भाई को फर्जी मामला दर्ज कराने तथा पोस्टमार्टम के मामले में गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अब फर्जी रूप से पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सक से भी पूछताछ कर रही है।

पुलिस अधीक्षक योगेश यादव ने बताया कि गिरफ्तार आरोपित छारेडा के खौबा की ढाणी निवासी नंदलाल मीना है। आरोपित ने 14 अक्टूबर 2017 को जरिए इस्तागासा रामगढ़ पचवारा थाने में मामला दर्ज कराया था कि उसके भाई किशनलाल मीना 18 अगस्त 2017 को अज्ञात वाहन की टक्कर से गंभीर रूप से घायल हो गया था। उसे जिला चिकित्सलाय में भर्ती कराया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। 19 अगस्त को चिकित्सकों ने पोस्टमार्टम कर शव परिजनो के सुपुर्द कर दिया।

इसके बाद मामले की जांच कोतवाली थाने में तैनात उप निरीक्षक सीमा शर्मा को सौंपी गई। उन्होंने मामले की जांच शुरु की तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। जांच व ग्रामीणों से पूछताछ में सामने आया कि आरोपित के भाई की मौत तो फरवरी 2017 में ही अज्ञात बीमारी से हो गई थी। इस पर उप निरीक्षक ने आरोपित से गहन पूछताछ की तो उसने अपना अपराध स्वीकार कर लिया ।

आरोपित ने बताया कि उसके भाई ने एक दुर्घटना बीमा ले रखा था। दुर्घटना में मौत होने पर पर उसे बीमे का क्लेम नहीं मिलता। इसी क्लेम के लालच में उसने अपने एक मिलने वाले अधिवक्ता से बात की तो उसने पहले फर्जी पोस्टमार्टम कराने तथा बाद में मामला दर्ज करने की बात कही।उस दौरान अधिवक्ता ने आरोपित को अस्पताल में चिकित्सक से भी मिलीभगत होने की बात कही। इस पर आरोपित ने अधिवक्ता से कमीशन बेस पर सौदा तय कर लिया और कुछ राशि अग्रिम भी दे दी। उसके बाद अधिकवक्ता व आरोपित ने चिकित्सक से मिलकर फर्जी पोस्टमार्टम करा मामला दर्ज करा दिया।

एसपी ने बताया कि पूरे मामले में जिला अस्पताल में फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट बनाने वाले चिकित्सक की भूमिका भी नजर आ रही है। चौंकाने वाली बात यह है कि जब आरोपित के भाई की मौत फरवरी में हो गई थी तो चिकित्सक ने अगस्त में किसका पोस्टमार्टम किया या फिर बिना पोस्टमार्टम किए ही रिपोर्ट तैयार कर दी। पुलिस इस मामले की जांच में जुटी है। इसमें अस्पताल प्रशासन की बड़ी खामियां उजागर हो सकेगी।

यहां देखें फोटो-http://v.duta.us/aiJG3wAA

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