[haridwar] - जीवन शैली को सुधारने में महत्वपूर्ण है साधना: डॉ. पंड्या

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हरिद्वार। देव संस्कृति विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डा. प्रणव पंड्या ने कहा कि साधना जीवन शैली को सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। योग, ध्यान, साधना के माध्यम से अपने तन को स्वस्थ और मन को संतुलित रखते हुए अपने पारिवारिक एवं सामाजिक जीवन को सुखद बनाया जा सकता है।

वह देसंविवि के मृत्युंजय सभागार में आयोजित नवरात्र साधना में जुटे युवाओं और साधकों को संबोधित कर रहे थे। कुलाधिपति डा. पंड्या ने कहा कि परिस्थिति और मन:स्थिति के बीच के तालमेल को जीवनशैली कहते हैं। हमारी जीवनशैली हमारे मन और शरीर दोनों को प्रभावित करती है। उन्होंने कहा कि जीवनशैली का मूल्यांकन चिंतन, चरित्र और व्यवहार से किया जाता है। इन सबका संतुलित होना अति आवश्यक है। इन तीनों से आहार, आचार, विचार ठीक रहता है और उचित कार्य करने में समर्थ रहते हैं। हमारे प्रकृति, कार्य, उद्देश्य, वातावरण, पर्यावरण, जलवायु यह सारे तत्व जीवनशैली को निरंतर रूप से प्रभावित करती हैं। इन सबका ध्यान रखना खुद के ध्यान रखने के समान होगा। उन्होंने कहा कि आज की मायावी चकाचौंध के सम्मोहन में सामान्य व्यक्ति बिना सोचे-विचारे इसके निर्देशों का अनुसरण करने के लिए विवश हो गया है। उन्होंने कहा कि ऋषि प्रणीत जीवन शैली ही एक मात्र ऐसा उपाय है जिससे मानव अपनी मानवता को कायम रख सकता है। समापन अवसर पर सर्वशक्तिमान माता की सामूहिक आरती कर युवाओं, साधकों ने अपनी साधना की सफलता के लिए प्रार्थना की। इस अवसर पर कुलपति शरद पारधी, प्रतिकुलपति डा. चिन्मय पंड्या, कुलसचिव संदीप कुमार आदि मौजूद थे।

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