[maharajganj] - शस्त्र लाइसेंस के नए शासनादेश में कई बदलाव

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शस्त्र लाइसेंस के नए शासनादेश में कई बदलाव

शस्त्र, कारतूस लेने पर जमा होगी आईडी

बैंक में प्रबंधक के स्थान पर शस्त्रधारक को लाइसेंस

महराजगंज। सांसद, विधायक और विधान परिषद सदस्य को व्यक्तिगत शस्त्र लाइसेंस जारी करने में वरीयता दी जाएगी। इनके अलावा अपराध पीड़ित, व्यापारी उद्यमी, बैंक, वित्तीय संस्थाओं और सैनिक या अर्द्धसैनिक बल अथवा पुलिस कर्मियों को भी प्राथमिकता मिलेगी। राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निशानेबाज भी शस्त्र लाइसेंस में वरियता प्राप्त कर सकेंगे। शास्त्र या कारतूस खरीदने के दौरान अब खरीदार को आईडी दिखाकर उसकी फोटो कापी दुकान पर जमा करनी होगी।

एडीएम इंद्रभूषण वर्मा ने बताया कि हाल भी में जारी हुए नए शासनादेश में यह व्यवस्था की गई है। बैंकों की सुरक्षा के लिए अब बैंक प्रबंधक के स्थान पर शस्त्र रखने वाले व्यक्ति को शस्त्र चलाने की ट्रेनिंग करवाने के बाद नया शस्त्र लाइसेंस जारी किया जाएगा। पूर्व में लागू की गई व्यवस्था की एक ही लाइसेंस पर दूसरे व तीसरे शस्त्र को दर्ज पर नये शासनादेश में रोक लगाते हुए इस व्यवस्था को खत्म कर दिया गया है। कहा गया है कि यूआईएन होने का यह अर्थ नहीं है कि उस पर एक से ज्यादा शस्त्र बिना अनुमति के दर्ज हो सकते हैं। एक ही यूआईएन पर दूसरा या तीसरा शस्त्र दर्ज कराना है तो प्रत्येक अतिरिक्त शस्त्र के लिए प्रक्रिया वहीं होगी। जो पहली बार शस्त्र खरीदने के लिए बनवाए गए लाइसेंस में अपनाई गई है। लाइसेंस में वरीयता पाने वालों में अपराध पीड़ित और वरासत के मामले भी शामिल किए गए हैं। विभिन्न विभागों में ऐसे कर्मचारियों को भी प्राथमिकता दी जाएगी जो प्रवर्तन कार्य में लगे हुए हैं। शासनादेश में यह भी कहा गया है कि नये शस्त्र लाइसेंस के लिए आवेदन करने वाले को अब शस्त्र चलाने का टेस्ट दिए जाने की शर्त को खत्म कर दिया गया है। अब लाइसेंस जारी करने से पहले फायरिंग नहीं कराई जाएगी। शस्त्र विक्रेताओं, दुकानदारों के बारे में निर्देश दिया गया है कि दुकानों में सेफ कस्टडी में जमा शस्त्रों का दुरुपयोग रोकने के लिए जिला मजिस्ट्रेट, एसडीएम व सीओ से समय समय पर निरीक्षण कराकर जमा शस्त्रों का सत्यापन कराएंगे। शस्त्र या कारतूस खरीद फरोख्त के दौरान खरीददार की पहचान के सुबूत के रूप में आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, पैनकार्ड पोर्ट आदि होना जरूरी है। यह आईडी धारक को ही शस्त्र या कारतूस विक्रय किए जा सकेंगे। इन अभिलेखों की फोटोकापी जमा करनी होगी। नया शस्त्र लाइसेंस जारी होने के दो वर्ष के अंदर असलहा न खरीद पाने पर लाइसेंस निरस्त किया जा सकता है। हालांकि, इसमें लिखित प्रतिवेदन पर एक वर्ष की अवधि और बढ़ाई जा सकती है। नवीनीकरण हर तीन वर्षों में होगा।...

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