[neemuch] - ऐसा क्या हुआ कि महिलाओं की दावेदारी को नहीं मिला महत्व

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नीमच. जिला मुख्यालय पर एक चाय वाले ने लोगों से 'नीमच का उम्मीदवार कौन हो' को लेकर राय मांगी थी। लोगों ने अपने मत भी पेटी में डाले थे। अब इसकी समीक्षा की गई तो यह प्रमाणित हुआ कि नीमच के लोगों ने नए चेहरे और महिलाओं को इस पद के लिए पूरी तरह से नकारा है। जिन लोगों की ग्रामीण क्षेत्रों में पकड़ है उन्हें ही अधिक मत लेकर अपना समर्थन दिया है।

महिलाओं को मिले एक-एक मत

फितरत चौक पर जैन टी स्टॉल पर लगाई गई पेटी में लोगों ने अपनी राय एक पर्ची में लिखकर डाली थी। इसमें सबसे चौकाने वाली बात यह सामने आई कि भले नीमच सीट से महिला को अवसर देने की बात कही जा रही हो, लेकिन लोगों ने अपनी राय में महिलाओं को पूरी तरह नकार दिया है। जिन महिलाओं के नाम सबसे आगे चल रहे हैं उन्हें भी एक-एक मत ही मिला है। जबकि पूर्व विधायकों या पूर्व में चुनाव लड़ चुके प्रत्याशियों पर लोगों ने अधिक विश्वास दिखाया है। जब भी राजनीतिक सर्वे होता है अलग अलग वर्ग के करीब 100-125 लोगों से ही रायशुमारी की जाती है। चाय वाले के यहां लगाई गई पेटी में भी 131 लोगों ने स्वैच्छा से अपनी राय लिखकर डाली थी। यह बात भी प्रमाणित है कि यह मैनेंज नहीं था। इसका प्रमाण इस बात से भी मिलता है कि जो महिलाएं चुनाव में दावेदारी कर रही हैं वे जिला पंचायत में महत्वपूर्ण पद पर हैं। उन्हें भी एक एक मत मिला है। एक रौचक तथ्य यह भी सामने आया है कि जो लोग नीमच विधानसभा सीट से चुनाव लड़ चुके हैं उन्हें ही दो डिजिट में मत मिले हैं। जिन्होंने अब तक चुनाव नहीं लड़ा है चाहे फिर वे प्रबल दावेदार ही क्यों न हो उन्हें एक डिजिट में मत मिला है। पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन को भी एक मत मिलना इस बात को पुख्ता करता है कि लोग महिला उम्मीदवार के पक्ष में कम हैं। इसी प्रकार युवा या नए चेहरे के पक्ष में लोगों ने न के बराबर मत किया है। आशय यह कि लोग पुराने और चुनाव लड़ चुके चेहरों पर ही विश्वास करते दिख रहे हैं। भाजपा के सामने एक विचारणीय प्रश्न यह भी खड़ा हो रहा है कि विधायक के अतिरिक्त दूसरे किसी नाम पर लोगों ने दो डिजिट में मत नहीं डाले हैं।

फोटो - http://v.duta.us/_GPC7QAA

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