[raipur] - अपन भीतर के 'रावनÓ ल कब जलाहू !

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सबो डहर रावन के पुतला जलाय जाही। कतकोन बछर ले जलावत आवत हें अउ कतकोन बछर ले जलाबेच करहीं! रावन के पुतला ह कतकोन किसिम के रहिथे। कहुं एक मुड़ी रहिथे, त कहुं दस मुड़ी के। अब तो सहरमन म हर बछर रावन के पुतला ह ऊंच होवत जावत हे। लइकामन मिलजुर के बांस म बोरा, पइरा, कागज लपेट के छोटकुन रावन बनाके घलो जलाथें। फेर, रावन ह मरबेच नइ करय। लइका-सियान सबोझन दसहरा के दिन रावन मारे के बस रसम भर निभाथें। कोनो ल रावन के समूल नास करे के चिंता नइये। तेकरे सेती हमर देस अउ समाज म अतेक रावन हे के वोमन सिधवा, ईमानदार, नैतिकवान, चरितवान मनखेमन ल नइ घेपंय। 'रावनमनÓ के राज चलत हे!...

फोटो - http://v.duta.us/TMZhlAAA

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