[raipur] - छत्तीसगढ़ म दसहरा

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दसहरा तिहार ह सामाजिक समरसता अउ विस्व बंधुत्व के संदेसा ले के आथे। कतको गंवई म नवरात म नौ दिन तक रामलीला होथे। ऐकर बाद दसवां दिन रावन, मेघनाथ अउ कुंभकरन के पुतला जलाए जाथे। दसहरा ह असत म सत के, अन्याय ऊपर नियाव के जीत के तिहार हे। जम्मो मनखेमन ल अपन अंतस के रावन जइसे दुरगुन ल मारे के संदेसा देथे दसहरा तिहार। इही पाइके हमर अंचल म दसहरा के अलगेच उछाह लोगनमन म देखे जाथे।

दसहरा के तियारी पहिली ले करे जाथे। रकम-रकम के चौकी सजाय जाथे। ए चौंकी म राम, लछमन अउ सीता के बन गमन के झांकी बनाय जाथे। छोटे सहरमन म एकठन बड़का मइदान म रावन के कागज ले पुतला बनाय जाथे। संझौती बेरा जब होथे, त सब नवा कपरा पहिन के दसराहा मइदान मा जुरत जाथें। राम, लछिमन अउ हनुमान ल पालकी म बइठार के धूमधाम से जुलूस निकाले जाथे। राम, लछमन अउ हनुमान के दरसन करके सब अपनआप ल धनभाग समझथें।...

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