[korba] - खेती-किसानी का काम बंद, बावजूद मनरेगा को नहीं मिल रहे मजदूर, इतने हजार मजदूर हुए कम

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कोरबा. मनरेगा के लिए मजदूर नहीं मिल पा रहे हैं, जबकि खेती-किसानी का दौर लगभग खत्म होने पर है। त्योहारी और चुनावी सीजन होने की वजह से मजदूर परिवारों की संख्या २७ हजार से सीधे ९ हजार में पहुंच गई है। मनरेगा में काम की रफ्तार जितनी शुरुआती महीनों में पड़ी। वित्तिय वर्ष समाप्त होते-होते अब इसकी गति मंद पडऩे लगी है। अप्रैल से शुरू हुए चालू वित्तीय वर्ष में शुरू के तिमाही में लगभग २१ हजार से २७ हजार अधिक मजदूर काम कर रहे थे।

लेकिन इसके बाद बरसाती सीजन आते ही जहां खेती किसानी का दौर शुरू हुआ वैसे ही मजदूर की संख्या कम होने लगी। जून से लेकर अक्टूबर तक खेती किसानी का दौर माना जाता है। इस सीजन में हर साल मजदूरों की संख्या बहुत कम हो जाती है। इसके अलावा १५ जून से १५ अक्टूबर तक आम तौर पर निर्माण कार्यों पर रोक लग जाती है लेकिन अब मॉनसून का ब्रेक खत्म हो गया है।...

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