[shahdol] - टीबी पीड़ितों के लिए नहीं है डीआर सेंटर, जिंदगी मौत से लड़ रहे मरीज

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शहडोल। संभाग की सबसे बड़ी सरकारी अस्पताल शहडोल में टीबी मरीजों के लिए डीआर (ड्रग रेसिस्टेंट) टीबी सेंटर ही नहीं है। इसके चलते टीबी पीडि़त मरीजों को भर्ती करके इलाज संभव नहीं हो पा रहा है। विभाग के पास भी जगह का रोड़ा है। डीआर टीबी सेंटर न होने की वजह से डॉक्टर्स के साथ विभाग को भी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। जिला अस्पताल में लंबे समय से डीआर सेंटर की कमी खल रही है। पहले मरीजों को भर्ती करके इलाज के लिए रीवा रेफर कर दिया जाता था लेकिन अब रीवा में भी हाथ खड़े कर दिए जाते हैं। इससे अब टीबी पीडि़त मरीज और डॉक्टरों के सामने एक बड़ी समस्या आ गई है। उधर नियमित देखरेख और आब्जर्वेशन न होने की वजह से अतिगंभीर टीबी (एमडीआर) के आधा सैकड़ा मरीज जिंदगी मौत के बीच जूझ रहे हैं। उधर डीआर सेंटर को जिला अस्पताल और अन्य मरीजों से दूर रखने के नियमों की वजह से अस्पताल प्रबंधन जिला अस्पताल में भी टीबी पीडि़तों के लिए वार्ड शुरू नहीं कर पा रहा है। सामान्य टीबी पीडित मरीजों का तो इलाज डॉक्टर्स कर देते हैं लेकिन एमडीआर टीबी पीडि़त मरीजों को भर्ती करके इलाज देना होता है। जिसके चलते जिला अस्पताल में मरीज और डॉक्टर्स में समस्या आ रही है।...

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