[bijnor] - बेटियों में शिक्षा का उजियारा कर रहीं डा. ऊषा

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बिजनौर के धामपुतर में कक्षा सात में ही ट्यूशन पढ़ाकर अपनी शिक्षा पूरी करने वाली डा. ऊषा शर्मा ने बेटियों की शिक्षा को ही जीवन का उद्देश्य बना लिया। इसके लिए वे कोई कसर नहीं छोड़ रही हैं। इस सराहनीय प्रयास के लिए उन्हें ऑल इंडिया वूमेन कांफ्रेंस का असिस्टेंट सेक्रेट्री बनाया गया। बेटियों को शिक्षित करने के लिए वे लोगों को भी जागरूक कर रही हैं।

डॉ. ऊषा शर्मा के मुताबिक जब वह कक्षा सात में पढ़ती थीं तो उनके पिता मनमोहन शर्मा बेरोजगार हो गए। पढ़ने की ललक में उन्होंने खुद ही ट्यूशन पढ़ाने शुरू किए। ट्यूशन से मिलने वाले पैसे अपनी पढ़ाई पर खर्च करतीं। कुछ दिनों बाद पिता की मृत्यु हो गई और परिवार सड़क पर आ गया। मगर, उन्होंने पढ़ाई नहीं छोड़ी। किसी तरह इंटर तक पहुंची तो परिजनों ने शादी कर दी। इसके बाद भी पढ़ने की ललक कम नहीं हुई। गृहस्थ जीवन के दौरान उन्होंने बीए, एमए आदि कोर्स किए। वे एसबीडी कॉलेज धामपुर में सामाजिक विज्ञान की विभागाध्यक्ष नियुक्त हुईं। गरीब घर की बेटियों को पढ़ाई के लिए जो संघर्ष करना पड़ता है, डा. ऊषा शर्मा उसे गुजर चुकी थीं। इस विकट समस्या को देखते हुए उन्होंने निर्धन परिवार की बेटियों को पढ़ाने का संकल्प लिया। पहले गरीब घर की बेटियों को एकत्र किया और एक स्कूल में शाम के समय उन्हें पढ़ाना शुरू किया। कॉलेज में जिन बेटियों की पढ़ाई धन के अभाव में छूटने को होती, वे अपने पास से उसकी फीस भरतीं। बेटियों की पढ़ाई के प्रति उनके जुनून को देखते हुए ऑल इंडिया वूमेन कांफ्रेंस ने उन्हें असिस्टेंट सेक्रेट्री बनाया। डा. ऊषा शर्मा कई बेटियों को स्कॉलरशिप दिला चुकी हैं। फाउंडेशन फॉर एक्सीलेंस के जरिए भी वे मेधावी बच्चों को स्कॉलरशिप दिला रही हैं।...

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