[chandauli] - दो माह में ही बदहाल हो गया 19.56 करोड़ का अस्पताल

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चंदौली। जिला चिकित्सालय में महिलाओं के बेहतर इलाज के लिए पीपीपी मॉडल पर करोड़ों रुपये से बना 100 बेड के महिला विंग अस्पताल दो महीने में ही बदहाली के कगार पर पहुंच चुका है। दवाओं और जांच के लिए जरूरी सामान उपलब्ध न होने से वहां मरीज भटक रहे हैं। हाल यह है कि ब्लड जांच के लिए एक टेस्ट ट्यूब को गरम पानी में उबालकर उसका दोबारा इस्तेमाल किया जा रहा है। दवाईयां नहीं होने से मरीज भटक रहे हैं। संसाधनों के अभाव में एक दर्जन से अधिक जांच पूरी तरह से प्रभावित है। प्रदेश सरकार ने गर्भवती महिलाओं व नवजात शिशुओं को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा के लिए लिए 19.56 करोड़ की लागत से पीपीपी माडल पर 100 बेड के अस्पताल का निर्माण कराया था । इसके संचालन की जिम्मेदारी हेरिटेज हास्पिटल को दी गई। हेरिटेज ग्रुप को डाक्टर मुहैया कराना है जबकि दवाएं एवं अन्य जांच सामग्री जिला अस्पताल को उपलब्ध करानी है। लेकिन फरवरी में इस अस्पताल का उद्घाटन होने के दूसरे सप्ताह में ही दवाएं और जांच के लिए टेस्ट ट्यूब खत्म हो गया। तब से आज तक दवाओं का अभाव है। मरीजों की विभिन्न प्रकार की जांच के लिए लगी मशीनें भी खराब हो रही हैं। सीबीसी जांच के लिए जरूरी केमिकल की आपूर्ति नहीं होने से उसकी जांच बंद है। हेपेटाइटिस तथा गर्भवती महिलाओं में एचआईवी की जांच के लिए किट भी उपलब्ध नहीं है। आपरेशन के समय महिलाओं में अधिक ब्लीडिंग की जांच के लिए पीटी की आवश्यकता होती है। यह पीटी भी अस्पताल में नहीं होने से दिक्कत आ रही है। कोट धन के अभाव में दवाएं उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। जांच उपकरण एवं दवाओं की आपूर्ति के लिए शासन को पत्र भेजा गया है। डा. राम भरोसे पांडेय, सीएमएस सीबीसी की जांच भी बंद है। इस जांच के तहत कुल सुुगर, रक्तचाप, यूरिन, ब्लड सहित कुल 13 प्रकार की जांच की जाती है। वहीं हेपेटाइटिस, एचआई, इएसआर की जांच नहीं हो पा रही है। इन दवाओं की आपूूर्ति बदं है उल्टी की दवा ओंडासीट्रान, सीजर के समय लगाए जानी वाली दवा माइक्रिल वन, बेहोश करने वाली दवा निफेटीन इंजेक्शन, एनिमिया की दवा आयरन सुप्रोज, आइक्सोलाइट एम के अलावा डीएनएस पानी की बोतल की भी आपूर्ति नहीं की गई है।

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