[gorakhpur] - डारिया के जरिए बिछाया हनीट्रैप का जाल

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गोरखपुर। मंडलीय कारागार में बंद डारिया मोलचन के दो मोबाइल फोन और एक मोबाइल टैब को जांच के लिए फोरेंसिक लैब लखनऊ भेज दिया गया है। प्रारंभिक छानबीन के बाद जो रिपोर्ट सामने आई है, उसके मुताबिक हनीट्रैप का जाल बिछाया गया था। इसके जरिए एयरपोर्ट से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां लीक की गई हैं। इंटेलीजेंस की सूचनाएं देश से बाहर भेजी गई हैं।

हनीट्रैप के इस खेल में अंतरराष्ट्रीय गिरोह के शामिल होने के संकेत मिले हैं। इसके तार नेपाल, दुबई, पाकिस्तान और यूक्रेन तक जुड़े हैं। इंटेलीजेंस ब्यूरो (आईबी) की जांच से पता है कि एयरपोर्ट से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां देश से बाहर भेजी गई हैं। विदेशी महिलाओं ने यूपी, दिल्ली और कोलकाता सहित तमाम एयरपोर्ट के कुछ अफसरों को अपनी जाल में फंसाया था। क्लब में बुलाकर सूचनाएं हासिल की जातीं, फिर विदेश भेजी जाती थीं। तमाम मददगार भारत में भी हैं। इनकी तलाश की जा रही है। कुछ बड़े अफसर, नेता, उद्योगपति भी जांच एजेंसियों के रडार पर हैं। एसटीएफ के मुताबिक डारिया का पासपोर्ट ब्लैक लिस्ट कर दिया गया था। वीजा भी नहीं था। इसके बावजूद वह यूक्रेन से नेपाल आई, फिर सड़क के रास्ते नेपाल से गोरखपुर आ गई। नई दिल्ली से फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस बनवाया, फिर नई दिल्ली सहित भारत के अलग-अलग शहरों में जाने लगी। इसी बीच गोरखपुर एसटीएफ ने डारिया को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। डारिया के पास से जो मोबाइल फोन जब्त किए गए थे, उसमें नई दिल्ली और कोलकाता के पुलिस अफसरों की आपत्तिजनक फोटो मिले हैं। अब मोबाइल फोन में मौजूद फोटोग्राफ की जांच फोरेंसिक लैंब से कराई जा रही है। प्रारंभिक छानबीन में महत्वपूर्ण साक्ष्य मिले हैं।

अनुज पोद्दार ने बदला ठिकाना

डारिया के फेसबुक फ्रेंड और शहर के कारोबारी अनुज पोद्दार ने गिरफ्तारी के डर से ठिकाना बदल दिया है। अब अनुज की लोकेशन नेपाल की जगह बैंकाक मिली है। एसटीएफ शहर के कारोबारी की गिरफ्तारी की कोशिश में लगी है। एसटीएफ ने मुकदमे की जो फर्द बनाई है, उसके मुताबिक गोरखपुर में डारिया मोलचन के मददगार अनुज ही थे। अनुज ने ही उसके होटल में ठहरने का इंतजाम किया था। अगले दिन गोरखपुर से सड़क के रास्ते काठमांडू नेपाल भेजने की योजना थी।

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