[haridwar] - महंत रामानंद पुरी की जान को बताया खतरा

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हरिद्वार। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरि महाराज ने कहा कि अखाड़े के महंत रामानंद पुरी द्वारा खुद को बंधक बनाने के संबंध में दूसरे महंत रविंद्र पुरी पर लगाए गए आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं। रामानंद को संतों ने नहीं बल्कि कुछ अन्य लोगों ने संपत्ति हड़पने के इरादे से बंधक बनाया हुआ है। उन्होंने महंत रामानंद पुरी की जान को खतरा बताते हुए प्रशासन से उन्हें मुक्त कराने की मांग की। निरंजनी अखाड़े के महंत रामानंद पुरी के नाम से ज्वालापुर के पास रामानंद इंस्टीट्यूट चलता है। पहले इस इंस्टीट्यूट को महंत रामानंद पुरी की निजी संपत्ति बताया जाता था, लेकिन कुछ समय से अखाड़े के संतों ने पहले प्रबंधन को हटाकर इंस्टीट्यूट को अपने कब्जे में ले लिया। इसे लेकर चल रहे विवाद के बीच महंत रामानंद पुरी ने पिछले दिनों देहरादून में पत्रकार वार्ता कर आरोप लगाया था कि अखाड़े के ही महंत रविंद्र पुरी ने उन्हें बंधक बनाकर उनकी संपत्ति से संबंधित दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करा लिए। बुधवार को हरिद्वार पहुंचे अखाड़े के श्रीमहंत और अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरि महाराज ने भी इस मामले में हस्तक्षेप किया। रामानंद इंस्टीट्यूट में पत्रकारों से वार्ता करते हुए उन्होंने रामानंद पुरी द्वारा रविंद्र पुरी पर लगाए गए खुद को बंधक बनाने के आरोप को निराधार बताया। कहा कि दिल्ली के एक पूर्व विधायक समेत दो महिलाएं और कुछ अन्य लोग इलाहाबाद से स्वामी रामानंद पुरी को एक समारोह में शामिल कराने की बात कहकर अपने साथ लाए थे। ये सभी लोग उनके जरिये अखाड़े की संपत्ति हड़पना चाहते हैं लेकिन उनकी कोशिशों को कामयाब नहीं होने दिया जाएगा। स्वामी नरेेंद्र गिरि महाराज ने जिलाधिकारी और एसएसपी से मांग उठाई कि महंत रामानंद पुरी को पूर्व विधायक और उनके साथियों के चंगुल से मुक्त कराकर वापस अखाड़े में लाया जाए ताकि उनका जीचन बचाया जा सके। इस दौरान मौजूद महंत रविंद्रपुरी ने कहा कि किसी भी संत का महंत रामानंद पुरी से कोई विवाद नहीं है। उन्हें अखाड़े में लौट आना चाहिए। अखाडे़ के नियमों के अनुसार वे जहां की भी चाहे जिम्मेदारी ले सकते हैं।

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