[kotdwar] - मालन नदी में वन निगम का खनन, चुगान आज से बंद

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कोटद्वार। मालन नदी में वन निगम का खनन व चुगान कार्य बुधवार शाम को बंद हो गया है। गत वर्ष के मानसूत्र सत्र के बाद इस साल 12 जनवरी को वन निगम ने चुगान कार्य शुरू किया था। चुगान कार्य में वन निगम ने 89.30 लाख रुपये का कारोबार कर 37 लाख रुपये की रायल्टी सरकार को जमा कराई। राज्य सरकार की ओर से उत्तराखंड वन निगम को मालन नदी में खनन व चुगान का कार्य गत वर्ष आवंटित हुआ था। मानसून सत्र के बाद इस साल 12 जनवरी को चुगान की अनुमति मिली। सरकार की ओर से वन निगम को इस बार केवल 20507 घनमीटर उपखनिज उठाने की अनुमति मिली थी। यह आवंटन सीमा बुधवार को समाप्त हो गई। वन निगम के प्रभागीय विपणन प्रबंधक राजेंद्र चौधरी और अनुभाग अधिकारी मुलायम सिंह बिष्ट ने बताया कि बुधवार शाम को आवंटन की सीमा खत्म होते ही चुगान बंद कर दिया गया है। बताया कि वन निगम खनन के मानकों के अनुरूप पूरे नियोजित तरीके से श्रमिकों के जरिए गैंती फावड़े से चुगान करवाता है। वन निगम को मालन नदी के ऊपरी छोर पर मोटर पुल के एक किमी का दायरा छोड़कर 12 हेक्टेयर का क्षेत्रफल चुगान के लिए आवंटित हुआ था। मालन में 13 साल बाद 22 मार्च को खुला था खनन कोटद्वार की मालन नदी में पूरे 13 साल बाद 22 मार्च, 2017 को खनन खुला था। तब वन निगम को खनन, चुगान के लिए केवल दो माह ही मिल सका। केंद्र सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की गाइडलाइन के अनुसार 31 मई, 2017 को मानसून सत्र के लिए नदी में खनन कार्य बंद कर दिया गया था। इसके बाद 12 जनवरी, 2018 को 12 हेक्टेयर क्षेत्रफल में 20507 घनमीटर उपखनिज के एलाटमेंट के साथ वन निगम को खनन व चुगान की अनुमति मिली थी। फोटो

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