वित्त 💴मंत्री अरुण जेटली बोले, महाभियोग का 😱उद्देश्य सीजेआई और दूसरे जजों का 👊डराना था

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केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि महाभियोग प्रस्ताव अपुष्ट आधारों पर रखा गया था। उन्होंने कहा कि इसका एकमात्र उद्देश्य मुख्य न्यायाधीश व दूसरे जजों को डराना था। उन्होंने कहा कि देश के मुख्य न्यायधीश के खिलाफ गलत सोच से लाया गया महाभियोग प्रस्ताव इस बात का उदाहरण है कि वकालत करने वाले सांसद न्यायालय के भीतर के झगड़े को खींच कर संसद तक ला रहे हैं।

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा, संसद अपने कार्य क्षेत्र में सर्वोच्च है। संसद की प्रक्रिया को समीक्षा के लिए न्यायालय में नहीं ले जाया जा सकता। गौरतलब है कि उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने एक दिन पहले ही कांग्रेस सहित सात विपक्षी पार्टियों की ओर से चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ दिए गए महाभियोग प्रस्ताव के नोटिस को खारिज कर दिया था।

वित्त मंत्री जेटली ने मंगलवार को फेसबुक पर अपनी एक पोस्ट में कहा है कि महाभियोग का कोई प्रस्ताव ऐसी बहुत असाधारण परिस्थितियों में ही लाया जाना चाहिये जहां किसी न्यायधीश ने अपने सेवाकाल में 'कोई भारी कसूर' कर दिया हो। ऐसे मामले में आरोप साबित करने के लिए ठोस सबूत होने चाहिए। जेटली ने लिखा कि कानाफूसी और अफवाह को सबूत का दर्जा नहीं दिया जा सकता। जेटली राज्यसभा के नेता भी हैं।

यहां देखें जेटली की पोस्ट- http://v.duta.us/26lTNgAA

पोस्ट में उन्होंने कहा, 'यह महाभियोग प्रस्ताव अपुष्ट बातों के आधार पर पेश किया गया था और इसका परोक्ष उद्येश्य भारत के मुख्य न्यायाधीश और सबसे बड़ी अदालत के अन्य जजों में डर पैदा करना था।' उन्होंने कहा कि दुर्भावना से लाया गया यह प्रस्ताव विफल होना ही था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी यदि किसी मामले में हित देखती हो और न्यायालय की राय उसके माफिक नहीं हो तो वह संबंधित न्यायाधीशों को विवाद में घसीटने और उन्हें विवादास्पद बनाने के काम में माहिर है।

जेटली ने लिखा है, 'किसी भी राजनीतिक विश्लेषक के लिए यह स्पष्ट था कि संसद में इस महाभियोग प्रस्ताव को दो-तिहाई बहुमत नहीं मिलेगा। कांग्रेस पार्टी भी यह जानती थी। उसका उद्देश्य प्रस्ताव को पारित कराना नहीं था बल्कि देश की न्यायपालिका को डराना था।'

यहां पढ़ें पूरी खबर- http://v.duta.us/SdG9AAAA

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