[almora] - तप किए बिना साधना नहीं हो सकती : मुरारी

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श्री कल्याणिका हिमालय देवस्थानम कनरा डोल आश्रम में रामकथा जारी है। तीसरे दिन सोमवार को कथा सुनाते हुए संत मुरारी बापू ने कहा कि साधना करने के लिए गुरु की कृपा आवश्यक है। गुरु की महिमा किसी से छिपी नहीं है। उन्होंने कहा कि तप किए बिना साधना नहीं हो सकती है।

उन्होंने कहा कि श्री ही विश्व का प्राण है। इससे जगत के सारे प्राणी प्रकाशित हैं। श्री पूर्णता का प्रतीक है। श्री तत्व पूर्ण भी है और शून्य भी है। उन्होंने कहा कि अधिकांश लोग श्री शब्द का जहां-तहां प्रयोग कर देते हैं। श्री शब्द कहां लगाना है इसके लिए सिद्धजनों से पूछना चाहिए। रामचरित मानस में स्वयं श्री यंत्र है। हनुमान चालीसा में भी श्री यंत्र है। रामकथा की शुरुआत भी श्री शब्द से हुई है।

माता सीता, पार्वती, रुकमणि आदि भी श्री हैं। श्री शब्द स्त्री और पुरुष लिंग है। सूखे जीवन को जो हरा भरा कर दे वही श्रीयंत्र है। उन्होंने कहा कि एक मत के अनुसार हर 25 साल में दुनिया में एक हलचल मचती है चाहे वह किसी भी रूप में हो। भारतीय संगीत में 42 राग हैं। जिसमें से छह पुरुष राग निकलते हैं जबकि 36 रागनियां हैं। चंद्रमा की 16 कलाएं हैं। इसमें भी एक कला श्री है।

श्री शब्द के बिना संसार की कल्पना भी नहीं कर सकते हैं। श्री समूचा वैभव और एश्वर्य है। किसी सिद्ध पुरुष का आश्रय पाने से जीवन सफल हो जाता है। इस मौके पर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, पूर्व मुख्यमंत्री और सांसद भगत सिंह कोश्यारी, विधायक गोविंद सिंह कुंजवाल, पूर्व विधायक मनोज तिवारी, पूर्व दर्जा मंत्री दिनेश कुंजवाल, लक्ष्मण सिंह लमगड़िया आदि मौजूद थे।

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