[jammu] - 12 साल की बच्चियों से ही नहीं, बलात्कार के हर मामले में हो फांसी की सजा

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राजोरी। कठुआ, सूरत, उन्नाव और देश में अन्य हिस्सों में बच्चियों के साथ बलात्कार की घटनाएं आने के बाद में हर तरफ से आरोपियों को सख्त से सख्त सजा देने की मांग उठ रही थी। ऐसे में कैबिनेट ने पाक्सो एक्ट में संशोधन को मंजूरी देकर बड़ा काम किया है। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलते ही यह कानून अमल में आ जाएगा। इसके बाद 12 वर्ष से कम आयु की बच्चियों के साथ बलात्कार करने वालों को सजाए मौत मिलेगी। केंद्र सरकार के इस कदम का राजोरी की बेटियों ने स्वागत किया है। हालांकि उन्होंने मोदी सरकार से अपील की है कि वह अपने निर्णय को बदलकर हर बलात्कारी को मौत की सजा देने का प्रावधान करे। उन्होंने केंद्रीय कैबिनेट के निर्णय का स्वागत तो जरूर किया, लेकिन उन्होंने आगाह करते हुए कहा कि कानून पहले से भी रहे हैं, इसलिए नए कानून का अमल सुनिश्चित करवाना ज्यादा अहम होगा। इस संबंध में छात्रा सेहरिश खान ने कहा कि मात्र नाबालिग बच्ची के साथ दुष्कर्म करने वाले को ही फांसी क्यों हो। हर बालिग, नाबालिग, बुजुर्ग या किसी को भी महिला के साथ दुष्कर्म करने पर सिर्फ और सिर्फ मौत की सजा ही होनी चाहिए। आज के इस आधुनिक युग में भारत की बेटियां सुरक्षित नहीं हैं। बेटी जब घर से बाहर निकलती है, तो उसके माता-पिता की सांसें तब तक हल्क में अटकी रहती हैं, जब तक वह घर नहीं लौट आती। जब तक देश में बलात्कार की सजा फांसी नहीं होगी और कानून पर सख्ती से अमल नहीं होगा, बेटियों को सुरक्षा नहीं मिल सकती है।छात्रा गुणमीत कौर ने केंद्रीय कैबिनेट के इस निर्णय को एकदम सही करार देते हुए कहा कि ऐसे कानून की जरूरत बहुत पहले थी। यदि कई साल पहले ऐसे कानून को बना दिया गया होता तो आज न जानें कितनी मासूम बेटियां दरिंदों के हाथों अपनी इज्जत और जान नहीं गंवानी पड़ती। गुणमीत ने अपील करते हुए कहा कि केंद्रीय कैबिनट के इस फैसले को राष्ट्रपति जल्द मंजूर करें, ताकि यह कानून लागू हो सके।कृतिका सभरवाल ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि नाबालिग के साथ दुष्कर्म करने वालों को हर हाल में फांसी की सजा ही मिलनी चाहिए। यदि इस प्रकार के कठोर कानून देश में लागू होते हैं तो इससे समाज में अच्छा संदेश जाएगा और देश की बेटियां व उनके अभिभावक अपनी बेटियों को लेकर फिक्रमंद नहीं रहेंगे। केवल नाबालिग ही नही,ं बलात्कार के हर आरोपी को मौत की सजा का कानून ही होना चाहिए। छात्रा इरम मलिक ने इस कानून का दिल से स्वागत करते हुए कहा कि यदि आज भी भारत की सरकार नहीं जागती है और इस प्रकार का कानून नहीं बनाती है, तो वह दिन दूर नहीं जब भारत में कोई भी अभिभावक बेटी को जम्म देने से पहले हजार बार सोचेगा। आज भी भारत में लिंग अनुपात का आंकड़ा चौंकाने वाला है। आए दिन बेटियों को गर्भ में ही मार देने की खबरें सुनने को मिलती हैं। इन सब पर भी ऐसा ही सख्त कानून बनना चाहिए। इरम ने कहा कि वर्तमान सरकार का कानून 12 साल तक की बच्चियों के साथ दरिंदगी करने वालों को ही सजाए मौत दिलाएगा। उसे युवतियों, महिलाओं और हर उम्र की पीड़िताओं को भी इस दायरे में लाना चाहिए, ताकि उनके साथ भी इंसाफ हो।शिक्षिका सविता शर्मा ने ऐसे कठोर कानून की वकालत करते हुए कहा कि विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश की बेटियों की सुरक्षा के लिए ऐसे कठोर कानून की जरूरत है। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद केंद्र सरकार के लिए इस कानून को जमीनी स्तर पर लागू करवाना सबसे ज्यादा अहमियत वाला कदम होगा। इसलिए हम सब इसका स्वागत करते हैं और उम्मीद करते हैं कि इस कानून से पीड़ित बच्चियों को इंसाफ मिलेगा।छात्रा कविता शर्मा ने इस संदर्भ में अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि महज कानून बना देने से क्या बच्चियों के साथ बलात्कार रुक जाएंगे। इसके लिए सरकार को समाज में जागरूकता बढ़ाने पर गंभीरता दिखानी चाहिए। लोगों की सोच बदलने का काम करना चाहिए। इसके लिए ऐसी संस्थाओं की मदद लेनी चाहिए, जो रेप विक्टिम्स के लिए काम करती हैं। हालांकि इस कानून के लागू हो जाने से दरिंदों में यह डर तो पैदा होगा ही कि इसके बाद उनकी जिंदगी खत्म। इसलिए वे डरेंगे। यह भी जरूरी है।नाबालिग के साथ दुष्कर्म करने वाले को फांसी की सजा के हक में बात करते हुए समाज सेवक गीतू गुप्ता ने कहा कि देश भर में उस समय सभी लोग जाग जाते हैं, जब किसी बेटी के साथ इस प्रकार की घिनौनी घटना होती है। देशवासियों को ऐसे कठोर कानून बनाने की वकालत के लिए खुल कर सामने आना चाहिए, ताकि भारत की हर बेटी का सम्मान सुरक्षित रहे। अब यदि कोई बच्चियों से दरिंदगी करेेगा तो उसे मौत का डर तो सताएगा ही। इसलिए केंद्र सरकार का यह कदम स्वागत योग्य है।

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