[jaunpur] - ध्रुव व प्रभु श्रीराम की थी दो मां

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सतहरिया। ध्रुव व प्रभु श्रीराम की दो मां थीं। एक जन्म देने वाली व दूसरी वन की मां है। सौतेली मां कैकेई के कारण प्रभु श्रीराम को और सौतेली मां सुरुचि के कारण ध्रुव को वन जाना पड़ा था। उक्त बातें वृंदावन धाम से आए कथा वाचक राजेंद्र महराज ने मुंगरा बादशाहपुर के बनवीरपुर गांव में चल रहे श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन रविवार को कही। उन्होंने कहा कि जब प्रभु श्रीराम वन से वापस अयोध्या लौटे तो सबसे पहले मां कैकेई से मिले। वहीं जब ध्रुव वन से वापस लौटे तो उनका सबसे पहले स्वागत उनकी सौतेली मां सुरुचि ने किया। उन्होंने कहा कि ध्रुव को उनकी सौतेली मां सुरुचि ने वन जाने का अवसर न दिया होता तो शायद वह भगवान की प्राप्ति न कर पाते। वन में वे पांच साल की अवस्था में ही अपनी कड़ी तपस्या के बल पर भगवान को प्राप्त कर लिए। उन्होंने कहा कि देवताओं ने भगवान से सवाल किया कि जीवन भर जंगलों में घोर तपस्या करने के बाद भी हम लोगों को आपका दर्शन सुलभ नहीं हो सका तो भगवान ने कहा कि यह ध्रुव के सात जन्मों का पुण्य है कि उन्हें हमें बाल्यावस्था में दर्शन देना पड़ा। जब राजा परीक्षित नारकीय जीवन की कथा सुनने को तैयार नहीं हुए तो सुखदेव महराज ने उन्हें भगवान के विराट स्वरूप को प्रकट किया जिससे उनका संशय दूर हो गया। उन्होंने कहा कि जब तक मनुष्य जीवन में ठोकरें नही खाता है, तब तक उसे जगत स्वामी का दर्शन संभव नहीं होता। आचार्य जय प्रकाश शास्त्री के संरक्षण में कथा का आयोजन हुआ। इस अवसर पर इंजीनियर सुरेश चंद्र पांडेय, डा. अरुण कुमार पांडेय, डा एके पांडेय, डा. अश्वनी पांडेय व डा. राकेश चंद्र पांडेय आदि उपस्थित रहे।

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