[meerut] - अहम है रिश्तों की डोर, जानिए, फिर चंद माह में क्यों टूट रही शादी

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मनचाहे दहेज की मांग ने आज रिश्तों की डोर इतनी कमजोर कर दी है कि शादी के चंद माह बाद ही पारिवारिक विवाद थानों और कचहरी में पहुंच रहे हैं। कहीं दुल्हन में कमी निकाली जा रही है तो कहीं दहेज के लिए उत्पीड़न किया जा रहा है। हालांकि कई मामलों में आपसी विवाद को दहेज उत्पीड़न से जोड़कर शिकायत कर दी जाती है। लेकिन कमोवेश हर केस में दहेज की यही दीवार रिश्तों के मंजिल तक पहुंचने में बाधा बन रही है।

परिवार परामर्श केंद्र और महिला थाने में दर्ज मुकदमों के आंकडे़ बताते हैं कि विवाद चाहे कुछ भी हो, दहेज की रकम रिश्तों में बाधा बनकर खड़ी हो रही है। शादी के बाद ससुराल में विवाहिता उत्पीड़न का दंश झेल रहीं हैं। विवाद का आपसी स्तर पर निपटारा नहीं होता तो घर की इज्जत कानून की चौखट पर पहुंच जाती है।

कई कारणों से टूट रहे रिश्ते...

दहेज उत्पीड़न के मामलों की परिवार परामर्श केंद्र पर काउंसिलिंग होती है। कई कारणों से रिश्ते टूट रहे हैं। कहीं पति और ससुराल वालों को बाद में बहू पसंद नहीं आयी तो कहीं विवाहिता पति के साथ रहना नहीं चाहती है। नेहा चौहान, महिला थाना इंस्पेक्टर

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