[shimla] - रोहतांग टनल में सेरी नाला बीआरओ के लिए बना चुनौती

  |   Shimlanews

सामरिक महत्व की रोहतांग टनल की खुदाई भले ही पूरी हो गई हो, लेकिन बीआरओ के सामने अब एक नई चुनौती खड़ी हो गई है। टनल के ऊपर बह रहे सेरी नाला की वजह से भीतर के 520 मीटर क्षेत्र में लीकेज नहीं रुक रही है। टनल में पानी भर रहा है। इसे रोकने के लिए ही सीमा सड़क संगठन को आठ माह लगेंगे।

विशेषज्ञों की राय के बाद अब नाले का रुख नहीं मोड़ा जाएगा, टनल के भीतर से ही लीकेज को रोकने और पानी को बाहर निकालने का पक्का प्रबंध किया जाएगा। सेरी नाले की वजह से ही रोहतांग टनल की खुदाई का काम करीब तीन साल 2012 से 2014 तक बंद रहा। नतीजतन टनल की लागत 1600 करोड़ से चार हजार करोड़ तक पहुंच गई। टनल से यातायात बहाली का लक्ष्य भी इससे पांच साल आगे 2019 तक बढ़ गया।

रोहतांग दर्रे के नीचे 8.8 किलोमीटर लंबी इस टनल की दोनों छोरों से खुदाई सितंबर 2017 में पूरी हो चुकी है। अब टनल के अंदरूनी कार्य जारी हैं। लेकिन सबसे बड़ी चुनौती सेरी नाले के पानी की लीकेज को रोकना है। टनल में 490 मीटर से आगे करीब 520 मीटर क्षेत्र में सेरी नाला की लीकेज है।

बीआरओ के अतिरिक्त महानिदेशक ब्रिगेडियर मोहन लाल ने बताया कि आठ माह में रोहतांग टनल के भीतर सेरी नाला की लीकेज पर काबू पा लिया जाएगा। विशेषज्ञ इसमें जुट गए हैं। उन्होंने कहा कि लीकेज रोकने और टनल के अंदर के कार्य साथ-साथ चलेंगे। उन्होंने तय समय पर यातायात बहाली का दावा किया।

यहां पढें पूरी खबर— - http://v.duta.us/k1-fYgAA

📲 Get Shimla News on Whatsapp 💬