[shimla] - 6 हजार करोड़ का घपला करने वाली टेक्नोमैक को लेकर एक और खुलासा

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करीब छह हजार करोड़ के घोटाले में फंसी इंडियन टेक्नोमैक कंपनी ने उद्योगों के लिए मिलने वाली सब्सिडी का कोई फायदा नहीं उठाया। लगभग छह साल तक यह कंपनी उद्योग विभाग में पंजीकरण किए बगैर ही चलती रही। हालांकि, कंपनी ने पंजीकरण के लिए आवेदन किया था। लेकिन, औपचारिकताएं पूरी नहीं कर पाने की वजह से मामला लटक गया।

इंडियन टेक्नोमैक कंपनी मामले में यह नया खुलासा हुआ है। जानकारी के अनुसार जिस जगह पर वर्ष 2014 तक यह कंपनी चलती रही, वहां पर पहले रही कंपनियों का पंजीकरण तो उद्योग विभाग के कार्यालय में हुआ था। लेकिन, टेक्नोमैक कंपनी ने यहां कोई पंजीकरण नहीं करवाया। जिस जगह पर इस कंपनी को स्थापित किया गया, वहां पहले अरविंद चौधरी के नाम से एक उद्योग पंजीकृत हुआ था।

बाद में अर्श कास्टिंग प्राइवेट लिमिटेड के नाम से परमानेंट रजिस्ट्रेशन जीएम-डीआईसी 06/10/02254 का 30/9/1990 में मिली। इस इकाई के बंद होने पर पत्र संख्या पीबी/ 500सीए/ आईआडी/ डी.रजिस्ट/ 07-1008-10/2 दो जुलाई 2007 में हो गया था। हैरानी की बात यह है कि वर्ष 2008 से 2014 तक इंडियन टेक्नोमैक कंपनी चली। लेकिन, इकाई प्रबंधन ने पंजीकरण नहीं करवाया।

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