[aligarh] - आंधी-बारिश से भारी तबाही, किसानों की टूटी कमर

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शुक्रवार की देर शाम आई आंधी-बारिश ने जिले में खूब तबाही मचाई। जिले भर में किसानों की कमर टूटने के कगार पर पहुंच गई। खेतों में खड़ी व कटी पड़ी फसल बर्बाद हो गई। वहीं जिले भर में विद्युत व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई, जबकि संचार व्यवस्था भी लड़खड़ा गई। होर्डिंग्स हवा में उड़ गए। तेज अंधड़ के चलते हरदुआगंज में सैकड़ों बीघे में लगी गेहूं की फसल जलकर राख हो गई। वहीं शहर के रजानगर में कब्रिस्तान की दीवार गिरने से एक युवक की मौत हो गई। आंधी-बारिश से कई स्थानों पर तार टूट गए। समूचा महानगर देर रात तक अंधेरे में डूबा हुआ था। वहीं, इस आफत से शहर की सूरत बिगड़ गई। बारिश से हुए जलभराव ने लोगों के लिए इस आफत को और दुगुना कर दिया।

शुक्रवार देर शाम से मौसम का मिजाज अचानक बदल गया। तेज हवा के साथ आंधी आ गई। धूल के गुबार में पूरा शहर डूबने लगा। इसके बाद बिजली चमकने लगी। बारिश और ओले भी पड़ने लगे। आंधी-बारिश ने शहर में तबाही मचा दी। मौसम का रुख भांपते हुए लोग घर में ही दुबके रहे। सड़क के किनारे लगे ढकेल पर छाता और पॉलिथीन उड़ गए। बिजली के खंभे टूट गए। पेड़ की टहनियां तार पर गिरीं, जिससे तार टूट गए। तार टूटने से बिजली गुल हो गई। उधर, आंधी-बारिश से हरदुआगंज के सिकंदरपुर माचुआ में 500 बीघे में खड़ी फसल जलकर राख हो गई, जबकि महानगर के रजानगर में कब्रिस्तान की दीवार गिरने से एक शख्स की मौत हो गई। आंधी-बारिश से जिले में कितना नुकसान हुआ है, इसका आकलन शनिवार को हो पाएगा?

गेहूं की खड़ी फसल में लगी आग

आंधी से शहर से जुड़े कई बाहरी इलाकों में खेतों में गेहूं की खड़ी फसल में आग लग गई। जिससे किसान की मेहनत खाक हो गई। इस बात का पता नहीं चल सका है कि यह आग बिजली के तार टूटने से लगी है या अन्य किसी कारण से लगी है। जो गेहूं की फसल खड़ी है उसकी बालियां टूट गई हैं। फसल गिर गई जिसे काटने में परेशानी होगी। जो बालियां जमीन पर गिर गई हैं वह बेकार ही हो गई हैं। इसके अलावा जो फसल कटी हुई पड़ी थी वह भी हवा में उड़कर ज्यादातर नष्ट हो गई। जिन लोगों का भूसा थ्रेसिंग के बाद पड़ा हुआ था वह भूसा भी हवा में उड़ गया। इस तरह किसान के लिए यह आंधी बर्बादी की आंधी बनकर आई। इससे पहले गुरुवार को भी अंधड़ से कई स्थानों पर बिजली आपूर्ति बाधित हो गई थी।

किसानों के चेहरों पर झलका दर्द, अरमान हुए धुआं

कई माह की मेहनत और लागत के राख हो जाने का दर्द किसानों के चेहरे से साफ झलक रहा था। ढसन्ना और सिकंदरपु्र माछुआ गांव के अनेक किसानों के अरमान धुआं हो गए। जब आग खेतों से आबादी की ओर बढ़ी तो अफरा तफरी मच गई, क्योंकि इससे इंसानों के अलावा पशुओं का जीवन भी खतरे में पड़ सकता था। शुक्रवार शाम ढसन्ना गांव के पास ईख के खेत से शुरू हुई आग आंधी के संपर्क में आते ही विकराल हो गई। हवा की गति से बढ़ती हुई आग ने किसानों को सोचने समझने तक का कोई मौका नहीं दिया। यहां तक कि कुछ किसानों के खेत में गेहूं की फसल कटी पड़ी थी जिसे उठाने की भरसक कोशिश की लेकिन उन्हें इतना भी मौका नहीं दिया।

पनैठी साधू आश्रम रोड के एक तरफ में ढसन्ना गांव है जबकि दूसरी तरफ सिकंदरपु्र माछुआ गांव है। बीच में रोड होने के चलते अधिकांश ग्रामीण आश्वस्त थे कि सड़क के कारण आग सिकन्दरपुर माछुआ गांव की ओर नहीं पहुंच सकेगी। हवा के वेग से आग ने सड़क को भी लपेटे में लेकर दूसरी तरफ की फसल को भी अपनी आगोश में ले लिया। इसके बाद ग्रामीणों में अफरा तफरी मच गई क्योंकि सड़क से महज दो सौ मीटर की दूरी पर ही गांव की आबादी है। इससे इंसानों तथा जानवरों की ही जान को खतरा पैदा हो गया। लोग चीख-चीख कर एक दूसरे से आग बुझाने तथा ट्रैक्टर चलाकर खेतों को जोतने की मदद मांग रहे थे। वहीं कुछ लोग दो सौ मीटर दूर स्थित गांव से पोखर से बाल्टियों में पानी भर-भर कर आग पर फेंकने में लगे रहे। कुछ लोग पैरों की चप्पलों से तो कुछ पेड़ों की टहनियों से आग की रोकथाम का प्रयास करते हुए दिखाई दे रहे थे। वहीं चीख पुकार सुनकर आसपास के कई गांव के लोगों ने दर्जन भर ट्रैक्टरों की मदद से आबादी से सौ मीटर पहले तक के खेतों को जलती आग के बीच ही जोत डाला जिससे वह आगे

बढ़ने से रुक गई। इस हादसे ने दर्जनों किसानों के अरमानों को जलाकर राख कर दिया जिसका दर्द उनकी आंखों से छलक रहा था। छर्रा तथा बरौली विधायक समेत एसडीएम कोल के द्वारा मुआवजे के आश्वासन के बाद किसानों ने राहत की सांस ली। एसडीएम कोल ने बताया कि मुआवजा जमीन स्वामी के नाम पर जारी होगा। जो लोग पट्टे पर खेती कर रहे थे, उनको जमीन स्वामी से बात कर मुआवजे की धनराशि दिलाई जाएगी। इस आगजनी में ग्राम प्रधान सुशील कुमार समेत सुशील फौजी, कुशलेन्द्र, संतोष शर्मा, राजकुमार, भगवती शर्मा, मनोज कुमार, लाल साहब, अमर पाल सिंह सहित दो दर्जन किसानों की फसल जलकर चौपट हो गई। इस बारे में शनिवार को तहसील कोल की राजस्व की टीम गांव जाकर अधिक जानकारी लेगी।

कब्रिस्तान की दीवार ढही, युवक की मौत

तेज आंधी बारिश के दौरान शुक्रवार देर शाम महानगर के क्वार्सी के रजा नगर नई आबादी में एक कब्रिस्तान की दीवार गिरने से उसकी ओट लेकर खड़े दो युवक मलबे में दब गए। इनमें से एक की मौत हो गई, जबकि उसका साथी बुरी तरह जख्मी हुआ है। इस खबर पर इलाके में भगदड़ मच गई और आनन-फानन मलबा हटाकर दोनों को निकाला गया। यहां से एक नर्सिंग होम भी ले आया गया, मगर एक को वहां मृत घोषित कर दिया।

रजा नगर नई बस्ती निवासी 18 वर्षीय सरफुद्दीन पुत्र रुकमुद्दीन रामघाट रोड स्थित फर्नीचर शोरूम में पिता के साथ मजदूरी का काम करते था। वह दो भाइयों में दूसरे नंबर का था। शुक्रवार की देर शाम को वह अपने दोस्त लाला के साथ पास में ही जंगल गया था। इसी दौरान अचानक मौसम बिगड़ गया और तेज आधी के साथ बारिश होने लगी। दोनों युवकों कब्रिस्तान की दीवार के सहारे खड़े होकर खुद का बारिश से बचाव करने लगे। इसी दौरान तेज आवाज के साथ कब्रिस्तान की दीवार दोनों युवकों के ऊपर आ गिरी। दीवार गिरने के कारण दोनों युवक उसके नीचे दब गए।

आवाज सुनकर आसपास के लोग आए तो उन्होंने युवकों को दीवार के नीचे दबा देखा। स्थानीय लोग बचाव कार्य में जुटे और पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलने पर पहुंची पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से दोनों युवकों को दीवार का मलवा हटाकर बाहर निकाला और रामघाट रोड स्थित स्थानीय अस्पताल ले गए। यहां चिकित्सकों ने सरफुद्दीन को मृत घोषित कर दिया, जबकि लाला का गंभीर हालत में इलाज शुरू कर दिया। देर रात परिजन शव घर ले आए थे। पुलिस पोस्टमार्टम कराने की बात परिजनों को समझा रही थी। परिवार में कोहराम मचा हुआ है।

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