[allahabad] - साथियों ने ही दिया अंत तक साथ

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इलाहाबाद विश्वविद्यालय में जेके इंस्टीट्यूट के शोध छात्र रहे शंख शुब्र पॉल की अंत्येष्टि साथियों को ही करनी पड़ी। छात्र के माता-पिता नहीं हैं। कोलकाता में एक सगी बहन है, जिससे संपर्क की कोशिश की गई लेकिन सफलता नहीं मिली। एक चचेरी बहन से फोन पर बात की गई लेकिन वह इलाहाबाद आने को तैयार नहीं हुई। जब कोई रास्ता नहीं बचा तो छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के सहयोग से दारागंज विद्युत शवदाहगृह में पॉल की अंत्येष्टि की और इसके बाद वैदिक रीति-रिवाज से अस्थियां संगम में प्रवाहित कीं। सभी छात्रों ने नम आंखों से अपने साथी को अंतिम विदाई दी।

गोल्ड मेडलिस्ट रहे शोध छात्र एसएस पॉल ने बृहस्पतिवार को एएन झा हॉस्टल में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्र के परिजनों से संपर्क का हर तरह से प्रयास किया लेकिन सफलता नहीं मिली। पॉल के करीबी रहे और हॉस्टल के अंत:वासी मृत्युंजय राव परमार ने छात्र की सगी बहन को कई बार फोर मिलाया लेकिन फोन नहीं उठा। काफी प्रयास के बाद एक चचेरी बहन का नंबर मिला लेकिन उसने इलाहाबाद आने से इनकार कर दिया और सिर्फ इतना कहा कि वह हिंदू था और वैदिक रीति-रिवाज से उसकी अंत्येष्टि कर दी जाए। छात्र के पिता मृणाल कांति पॉल और मां बसंतिका पॉल का पहले ही निधन हो चुका है। तमाम प्रयासों के बावजूद जब परिवार का कोई सदस्य आने को तैयार नहीं हुआ तो छात्रों ने खुद अंत्येष्टि करने करने का फैसला किया।

विश्वविद्यालय प्रशासन के सहयोग से पॉल का शव दोपहर ढाई बजे दारांगज घाट ले जाया गया और वहां विद्युत शवदाह गृह में अंत्येष्टि की गई। छात्र मृत्युंजय राव परमार, नितेश सिंह राजपूत, कुंवर साहब सिंह, अंशु सिंह, प्रियांशु गुप्ता ने वैदिक रीति-रिवाज के साथ पॉल की अस्थियां संगम में प्रवाहित कीं। घाट पर चीफ प्रॉक्टर प्रो. राम सेवक दुबे, डीएसडब्ल्यू प्रो. हर्ष कुमार, जेके इंस्टीट्यूट के हेड प्रो. नरसिंह, वित्त अधिकारी प्रो. एनके शुक्ला, सुरक्षा अधिकारी अजय सिंह, सीओ कर्नलगंज आलोक मिश्र, शोध छात्र कमल किशोर उपाध्याय समेत एएन झा छात्रावास और जेके इंस्टीट्यूट के छात्र एवं शिक्षक मौजूद रहे।

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भूखे सो गए छात्र, हॉस्टल में पसरा सन्नाटा

  • शोध छात्र एसएस पॉल को एएन झा छात्रावास में कमरा नंबर-103 आवंटित था। कमरे के बाहर अब ताला लटका हुआ है। हॉस्टल में सन्नाटा पसरा हुआ है। बृहस्पतिवार को घटना के बाद दुखी हॉस्टल के छात्रों ने भोजन नहीं किया और सो गए। शुक्रवार को भी ऐसे ही हालात रहे। पॉल के करीबी रहे शोध छात्र मृत्युंजय राव परमार का कहना है कि माता-पिता के निधन के बाद परिवार ने दूरी बना ली थी। इस बेरुखी से पॉल सर काफी दुखी रहने लगे। पिछले पंद्रह दिनों से उनका ज्यादातर समय अपने कमरे में बीतता था लेकिन उनके जैसे जीनियस स्टूडेंट बहुत कम देखने को मिलते हैं। उनका जाना न केवल हॉस्टल, बल्कि विश्वविद्यालय के लिए भी एक क्षति के समान है।

एएन झा छात्रावास में सोमवार को होगा शांति पाठ

  • एएन झा छात्रावास के अंत:वासियों ने निर्णय लिया है कि एसएस पॉल की अंत्येष्टि के बाद बाकी रीति-रिवाज भी हॉस्टल के छात्र ही पूरा करेंगे। तय हुआ है कि सोमवार को हॉस्टल में आर्यसमाज रीति से शांति पाठ और ब्राह्मण भोज भी कराया जाएगा।

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