[bageshwar] - 93 की उम्र में भी कपकोटी का जोश युवाओं से कम नहीं

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बागेश्वर। चर्चिल ने कहा था कि ‘सबसे बड़ा धन सेहत है’ और यह बात 93 वर्ष के नारायण सिंह कपकोटी पर पूरी तरह सटीक बैठती है। इस उम्र में भी वह बगैर चश्मा लगाए समाचार पत्र बढ़ते हैं और बिना किसी सहारे के दो किमी पैदल घूमते हैं। कपकोट के पूर्व प्रधान कपकोटी का जन्म 12 दिसंबर 1925 को हुआ था।

23 साल की उम्र में वह ग्वालियर के जीवा जी राव सिंधिया महराजा की सेना में भर्ती हो गए। आजादी के बाद रियासतों का विलय जब हुआ तो वह भारतीय सेना में भर्ती हो गए। कपकोटी बताते हैं उन्होंने 1948 में कश्मीर में कबायली, 1960 में पुर्तगालियों और 1956 से 63 तक में नगालैंड में विद्रोहियों से लोहा लिया। 1965 में पाकिस्तान से हुई जंग लड़ी।

आठ जून 1989 को वह ऑनरेरी सूबेदार के पद से सेवानिवृत हुए। घर आने के बाद 11 साल तक प्रधान रहे। बेहद अनुशासित जीवन जीने वाले कपकोटी बताते हैं कि शरीर को आलसी नहीं बनाना चाहिए। संतुलित भोजन लेना चाहिए। योग और प्राणायाम से ही दिन की शुरूआत करें तो और भी अच्छा।

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