[dehradun] - उत्तराखंड: गेहूं बीज बिक्री के नाम पर बीस करोड़ से ज्यादा का है टीडीसी घोटाला

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गेहूं बीज बिक्री के नाम पर 16 करोड़ का घोटाला करने वाले कर्मचारियों ने बीज खपाने के बाद क्लेम के नाम पर टीडीसी को सवा चार करोड़ की चपत भी लगा दी।

इससे पूरा घोटाला बीस करोड़ के पार पहुंच चुका है। सूत्रों के अनुसार, लैब में बीज खराब होने के बाद वितरकों ने टीडीसी से करीब एक करोड़ 90 लाख का क्लेम मांगा था, जो रद्द कर दिया गया था। इसके बाद वितरक बकाया भुगतान की करीब चार करोड़ की रकम दबा गए। हल्दी लैब की गोपनीय जांच रिपोर्ट लीक होने पर टीडीसी के सामने क्लेम के फर्जी होने का खुलासा हुआ।

वर्ष 2015-16 में किसानों की फसल के लिए टीडीसी से दूसरे प्रांतों को भेजे गए करीब 85 क्विंटल बीज के नमूनों को कर्मचारियों ने हल्दी लैब में फेल दिखा दिया था। इन बीजों को बेचने के लिए टीडीसी ने डेढ़ क्विंटल पर आधा क्विंटल बीज देने की योजना निकाली थी। इसके बाद कर्मचारियों ने किसानों के नाम पर लिए बीज को वितरकों की मदद से आटा मिलों में पहुंचाया था। अब तक टीडीसी को घोटाले की आशंका नहीं थी।

विभागीय सूत्रों के अनुसार वितरकों ने टीडीसी के सामने खराब दिखाए गए बीज पर करीब एक करोड़ 90 लाख रुपये क्लेम देने की मांग की। टीडीसी ने नियमानुसार खराब बीज का बैग और बीज प्रमाणिक संस्था का टैग वितरकों से मांगा था, जो वितरक नहीं दे सके थे। इस पर टीडीसी की छह सदस्यीय कमेटी ने क्लेम को रद्द किया तो वितरकों ने टीडीसी को भुगतान किए जाने वाले सवा चार करोड़ रुपये हड़प लिए। टीडीसी ने जांच बैठाकर वितरकों के दस्तावेज जांचे तो बिहार के वितरकों के दस्तावेजों में लैब की जांच और क्लेम के फर्जी होने की पुष्टि हुई।

लैब की गोपनीय रिपोर्ट लीक होने से हुआ खुलासा

टीडीसी ने वितरकों से क्लेम से पहले बीज खरीद के उन दस्तावेजों को भी मांगा जिसमें टीडीसी का प्लांट नंबर, लॉट नंबर और बीज का प्रकार दर्ज होता है। क्लेम को सही साबित करने के लिए कर्मचारियों ने वितरकों को लैब की जांच रिपोर्ट दे दी। टीडीसी के सामने लैब की गोपनीय रिपोर्ट आने पर यह फर्जीवाड़ा सामने आया।

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