[hamirpur] - मनरेगा भुगतान लटकने से मजदूरों ने मुंह मोड़ा

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हमीरपुर। अन्ना गोवंश से निजात दिलाने को स्थानीय स्तर पर जिले के 13 स्थानों पर मनरेगा के जरिए आदर्श आश्रय स्थापित हो रहे हैं। मनरेगा से निर्मित होने वाले इन आश्रय स्थलों का काम मजदूरी न मिलने से बंद है। पशुपालन विभाग की देख-रेख में हो रहे इस कार्य को कराने के लिए शासन ने 1.42 करोड़ की धनराशि जारी कर दी है।

जिले में पिछली सरकार ने सुमेरपुर, कुरारा, सरीला व गोहांड कस्बों में कान्हा पशु आश्रय स्थल योजना में गोशाला निर्माण को 5.56 करोड़ रुपये की धनराशि जारी की थी, लेकिन किसी भी नगर निकाय ने गोशाला को संचालित करने में दिलचस्पी नहीं दिखाई।

13 गांवों में आदर्श आश्रय स्थलों का निर्माण तो शुरू हुआ, लेकिन मनरेगा योजना बाधा बनी है। मजदूरों को मजदूरी का भुगतान नहीं होने से इन लोगों ने काम बंद कर दिया है। प्रधानों का कहना है कि मनरेगा के तहत मजदूरों ने करीब डेढ़ माह काम किया, लेकिन मजदूरी खातों में नहीं भेजी गई।

वहीं अब फसलों की कटाई शुरू होने पर मजदूर वर्ग के लोगों को फसल काटने का काम मिल गया है। ऐेसे में मजदूर काम पर नहीं आ रहे हैं। अन्ना मवेशी किसानों की नाक में दम किए हैं।आदर्श आश्रय स्थल पशुओं को रखने के लिए भूसा चारा गोदाम, स्टोर रूम, बीमार पशुबाड़ा, अडग़ड़ा, समर्सेविल पंप, 10 पशु पर एक श्रमिक लगेगा।

100 पशुओं के रखे जाने पर 1950 वर्ग मीटर जमीन लगेगी। इसमें बाउंड्रीवाल व गेट के साथ सर्दी से बचाने के लिए कवर्ड बाड़ा का निर्माण होगा। आश्रय स्थल के अलावा हरे चारे के लिए एक हेक्टेयर भूमि चाहिए। पशुओ के बीमार होने पर निकटम पशुचिकित्सालय में इलाज होगा।

जल्ला में 3.70 लाख, डिमुहाडांडा में 3.92 लाख, छानीबुजुर्ग में 3.99 लाख, छानीखुर्द में 3.23 लाख, मिहुना में 7.03, गहरौली में 7.24 लाख, अमगांव में 3.85 लाख, गुढ़ा में 3.22 लाख, बौखर में 2.51 लाख, इंदरपुरा में 1.61 लाख, बरेल में 2 लाख, जराखर में 6.56 लाख, अमगांव में 3.85 लाख की लागत से पशु आश्रय बनाए जाने हैं।

पिछले जनवरी से 20 फीसदी भुगतान शेष हैं। जबकि फरवरी के बाद से मनरेगा की मजदूरी नहीं मिली है। सभी मजदूरों के खातों की फीड़िंग का कार्य पूरा करा दिया दिया गया है। शीघ्र ही मजदूरों के खातों पर धनराशि भेजी जाएगी।

महेंद्र देव, मनरेगा

पशु आश्रय स्थलों के लिए 1.42 करोड़ शासन ने जारी किए हैं। इस धनराशि को कहां लगाया जाएगा यह जिलाधिकारी तय करेंगे। संभव है कि जहां कहीं पर पशु आश्रय स्थलों का निर्माण हो रहा है वहीं पर इस बजट को खर्च किया जाए।

डा.विजय सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी

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