[haridwar] - .गायब संत को भूला कुंभनगरी का संत समाज

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हरिद्वार।
अपने उग्र तेवरों से केंद्र-राज्य की सरकारों के खिलाफ विरोध के स्वर बुलंद करने वाले संत समाज ने श्री पंचायती बड़ा अखाड़ा उदासीन के कोठारी रहे संत मोहनदास के गायब होने के मामले में अब खामोशी ओढ़ ली है। आठ माह से अधिक समय गुजरने के बाद भी उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश पुलिस गायब संत को खोज निकालने में नाकामयाब रही है। दोनों राज्यों की भाजपा सरकार भी अब इस प्रकरण को भूल सी गई है।
सितंबर माह में हरिद्वार रेलवे स्टेशन से मुंबई के लिए निकले संत मोहनदास गायब हो गए थे। दिल्ली में ट्रेन के पहुंचने पर उनके सामने की बर्थ पर सवार यात्री ने खुलासा किया था कि जब ट्रेन दिल्ली पहुंची तब संत अपनी बर्थ पर मौजूद नहीं थे। उनका कुर्ता और सामान ट्रेन में ही मिला था।
यूपी और उत्तराखंड पुलिस ने जब पड़ताल शुरू की तब संत के मोबाइल फोन नंबरों की आखिरी लोकेशन वेस्ट यूपी के मेरठ में होना सामने आई थी। यूपी एवं उत्तराखंड पुलिस का पूरा फोकस मेरठ पर ही आकर ठहर गया था और अगस्त माह में संत के मेरठ के ही छोटे से होटल में दो दिन ठहरने की बात भी सामने आई थी। बावजूद इसके यूपी और उत्तराखंड एसटीएफ की खोज भी सिरे नहीं चढ़ पाई। संत के गायब होने पर हरिद्वार के संत समाज से लेकर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने भी तब हुंकार भरी थी, उसी का नतीजा था कि सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत खुद अखाड़े में पहुंचे थे। लेकिन कुछ दिन बाद संत समाज ने गायब संत को लेकर खामोशी की चादर ही ओढ़ ली। संत के गायब होने के पीछे तरह- तरह के किस्से कहानियां सामने आई, लेकिन वास्तविकता से किसी का जुड़ाव निकलकर नहीं आया। संतों की खामोशी को लेकर भी तरह- तरह की चर्चा है।

सीबीआई जांच पर खामोशी
राज्य सरकार सीबीआई जांच के लिए तैयार थी। फिर संत समाज ने सीबीआई जांच से हाथ क्यों पीछे खींच लिए, ये बड़ा सवाल है। सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने खुद हामी भर दी थी कि उनकी सरकार सीबीआई जांच की सिफारिश कर देगी।

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