[jhajjar-bahadurgarh] - प्रापर्टी और चौधर के विवाद में फंसा 250 विद्यार्थियों का भविष्य

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अमर उजाला ब्यूरो
बहादुरगढ़।
वैश्य आर्य कन्या प्राथमिक स्कूल के 250 विद्यार्थियों का भविष्य महाराजा अग्रसेन ट्रस्ट की चौधर और प्रॉपर्टी के विवाद में फंस गया है। बच्चों के अभिभावक शुक्रवार को उनके भविष्य को लेकर भटकते रहे। उधर, यह खुलासा हुआ है कि महाराजा अग्रसेन ट्रस्ट के पांच सदस्य हैं और इनमें शामिल न होने की वजह से अशोक गुप्ता को ट्रस्ट की संपत्ति को ताला लगाने का अधिकार ही नहीं है।
अग्रसेन ट्रस्ट के सदस्यों ने रेलवे रोड पर स्थित वैश्य आर्य कन्या प्राथमिक स्कूल के गेट पर वीरवार को ताला जड़ दिया था। यह स्कूल 70 वर्षों से इसी जमीन पर चल रहा है। इस स्कूल में 250 विद्यार्थी पढ़ते हैं। शुक्रवार को दिनभर लोग यही पूछते रहे कि दोनों पक्षों की लड़ाई में उन 250 बच्चों का क्या होगा जो अब तक यहां पढ़ते थे। शुक्रवार को भी कई विद्यार्थियों के परिजनों ने स्कूल की मुख्याध्यापिका से बातचीत कर स्कूल व बच्चों के भविष्य के बारे में पूछताछ की। कई अभिभावकों ने इस स्कूल की पांचवीं कक्षा में पढ़ने वाले अपने बच्चे के एसएलसी के लिए बातचीत की। उधर, संस्था से जुड़े रामधन गुप्ता ने कहा कि अशोक गुप्ता स्कूल की तदर्थ समिति में नहीं हैं, तो उन्हें स्कूल के किसी मामले में दखल देने का अधिकार भी नहीं है।
स्कूल को नहीं होने देंगे बंद : श्रीनिवास
कन्या शिक्षा के रास्ते में रोड़ा अटकाने वालों को उनके मकसद में किसी भी हालत में कामयाब नहीं होने दिया जाएगा। चाहे इसके लिए उन्हें किसी तरह की लड़ाई क्यों न लड़नी पड़े। यहां पर 250 विद्यार्थियों के भविष्य का सवाल खड़ा हो गया है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा दिलाने के लिए हर संभव लड़ाई लड़ी जाएगी।
- श्रीनिवास गुप्ता, प्रधान, बहादुरगढ़ शिक्षा सभा।

एडहाक कमेटी में हैं ये सदस्य
वैश्य आर्य कन्या प्राथमिक स्कूल की एडहाक कमेटी में अशोक गुप्ता के नाम को सब रजिस्ट्रार सुरेश मलिक ने सिरे से खारिज किया है। उन्होंने रिकार्ड के अनुसार कमेटी में रामधन गुप्ता, शिव कुमार गुप्ता, मंगतराय गोयल, रामनिवास गुप्ता व प्रवीण गर्ग शामिल हैं।

परिजन परेशान : अग्रवाल
स्कूल के गेट पर ताला लगने के बाद से बच्चों के परिजन परेशान हैं। शुक्रवार को कई अभिभावक हमारे पास आए। हमें 250 बच्चों के भविष्य की चिंता है। बच्चों का रिकॉर्ड भी स्कूल कार्यालय में ही है। मैं स्कूल भवन के बाहर रहकर किसी को एसएलसी भी नहीं दे सकती। बच्चों को एसएलसी मिल जाएं तो दूसरे स्कूल में दाखिला ले सकते हैं। स्कूल का ताला खुलेगा तो ही बच्चों के एसएलसी दिए जा सकते हैं।
- अंजू अग्रवाल, मुख्य अध्यापिका।

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