[jhajjar-bahadurgarh] - मंत्री के आदेश देने पर भी नहीं हुई निजी बस पर कार्रवाई

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अमर उजाला ब्यूरो
झज्जर।
मंत्रियों के आदेशों पर कार्रवाई करना प्रशासनिक अधिकारी उचित नहीं समझते। जिसका रोना अक्सर मंत्री प्रदेश के मुखिया मनोहर लाल के सामने भी रोते हैं। झज्जर में भी कुछ ऐसा ही हुआ है। वीरवार को लोक निर्माण मंत्री राव नरबीर ने कष्ट निवारण समिति की बैठक ली थी। बैठक में मंत्री के सामने दो कॉलेजों की तीन छात्राओं ने बताया था कि निजी बस के संचालक उनसे बदतमीजी करते हैं। नि:शुल्क बस यात्रा का पास होने के बावजूद टिकट लेने के लिए कहते हैं, टिकट न लेने पर चालक-परिचालक उन्हें बस से नीचे उतार देते हैं।
इस पर वहां मौजूद आरटीए का चार्ज देख रहे एडीसी सुशील सारवान ने छात्राओं से निजी बस का नंबर मांगा था। छात्राओं ने एडीसी को बस नंबर नोट करवा दिया था। मंत्री ने बस को इंपाउंड करवाने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद शुक्रवार को भी मामले में आरटीए कार्यालय द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई। ऐसे में साफ दिख रहा है कि अधिकारी मंत्रियों को किस प्रकार से फजीहत करवा रहे हैं और मंत्री अधिकारियों के सामने बेबस नजर आ रहे हैं।

काफी पुरानी समस्या
निजी बस संचालकों के द्वारा की जा जाने वाली बदतमीजी कोई अकेली रेनू, ज्योति, कीर्ति, मनीषा या ऋतु की समस्या नहीं है। कॉलेज और तकनीकी शिक्षा के लिए आने वाली हर छात्रा के साथ निजी बस चालक-परिचालकों का यही व्यवहार होता है। ये छात्राओं का पास अपनी बसों में मान्य नहीं करते और टिकट नहीं लेने के पर बदतमीजी करते हैं। सरकारी नियम के बावजूद आरटीए की सख्ती नहीं होने से इन हरकतों से बाज नहीं आ रहे।
वहीं, एडीसी सुशील सारवान का पक्ष जाननेे के लिए उनके तीन अलग-अलग मोबाइल नंबर पर संपर्क किया गया लेकिन सभी नंबर बंद मिले। वहीं उनके पीए के पास भी फोन करने का प्रयास किया गया तो उनका नंबर भी पहुंच से बाहर मिला।
वर्जन
शुक्रवार को मैं छुट्टी पर रहा, इसलिए कोई कार्रवाई नहीं हो सकी। शनिवार और रविवार को सरकारी अवकाश रहेगा तो इस मामले के बारे में सोमवार को आरटीए से बात की जाएगी।
- जसबीर, असिस्टेंट, आरटीए झज्जर।

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